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Lucknow : वीजा बिना टूटा विदेश यात्रा का मंसूबा, मेक माई ट्रिप चुकाए 5.89 लाख, राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला

Tue, 04 Apr 2023 10:06 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

पीड़ित को हुई परेशानी को सेवा में कमी मानते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार की दो सदस्यीय पीठ ने कंपनी को टिकट व अन्य खर्च के बतौर 5,74,298 रुपये, क्षतिपूर्ति मद में 10 हजार और वाद खर्च में 5000 रुपये चुकाने का आदेश दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार
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मेक माई ट्रिप (इंडिया) प्राइवेट लि. को अग्रिम भुगतान के बाद भी समय पर वीजा न मिल पाने से विदेश यात्रा जाने का मंसूबा अधूरा रह गया। इससे पीड़ित को हुई परेशानी को सेवा में कमी मानते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार की दो सदस्यीय पीठ ने कंपनी को टिकट व अन्य खर्च के बतौर 5,74,298 रुपये, क्षतिपूर्ति मद में 10 हजार और वाद खर्च में 5000 रुपये चुकाने का आदेश दिया है।

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पीठ ने अपने फैसले में जिला आयोग, वाराणसी के पूर्व पारित आदेश को बरकरार रखते हए पीड़ित को वाद प्रस्तुत करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक 09 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज भी चुकाने को कहा है। वाराणसी निवासी रमेश चंद्र यादव ने मेक माई ट्रिप के माध्यम से परिवार के साथ विदेश यात्रा पर जाने की बुकिंग करा अग्रिम भुगतान किया था। अंतिम समय पर कंपनी ने वीजा न मिल पाने के कारण ट्रिप को रद्द बता दिया।

इस कारण हुई शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के हर्जाना के साथ कंपनी से अग्रिम भुगतान राशि वापस दिलाने को यह वाद जिला उपभोक्ता आयोग वाराणसी में दाखिल किया गया। इसमें बताया कि कंपनी की लापरवाही व त्रुटि के कारण वीजा न मिलने से उन्हें अपनी विदेश यात्रा को निरस्त करना पड़ा। सुनवाई के बाद जिला आयोग ने अपीलार्थी रमेश चंद्र के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को आदेशित किया कि उन्हें टिकट व अन्य खर्च के बतौर 5.89 लाख रुपये चुकाए।
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जिला आयोग से पारित आदेश के खिलाफ मेक माई ट्रिप कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दाखिल की। इसमें बताया कि यात्रा पंजीकृत करते समय ही उपभोक्ता को यह बता दिया गया था कि कंपनी वीजा प्राप्त करने में केवल सहायता प्रदान करती है, वीजा प्रदान करने का जिम्मा संबंधित प्राधिकारी के विवेकाधिकार पर ही संभव है। चूंकि ट्रिप के लिए वीजा प्राप्त नहीं हुआ, ऐसे में कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

पीठ ने माना कि वीजा रद्द होने का दस्तावेज देखने से कि साफ होता है कि गंतव्य स्थान पर आवास की संतोषजनक व्यवस्था न होने के कारण ही वीजा नही मिल पाया। चूंकि निवास की व्यवस्था सुनिश्चित कराना कंपनी की जिम्मेदारी थी, इसलिए यात्रा रद्द होने के लिए कंपनी के कृत्य को सेवा में लापरवाही माना जाना चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में क्षतिपूर्ति के संबंध में जिला आयोग के पूर्व पारित फैसले को बरकरार रखते हुए कंपनी की अपील को निरस्त कर दिया।

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