राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पीलीभीत में नाबालिग रेप पीड़िता के पिता द्वारा आत्महत्या करने के मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला करार देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, इस मामले की जांच की वर्तमान स्थिति और एससी-एसटी एक्ट के नियमों के तहत पीड़िता को आर्थिक सहायता मुहैया करने के बारे में भी पूछा है। आयोग ने उन पुलिस अधिकारियों के नाम भी बताने को कहा है, जो इस घटना के दोषी हैं।
दरअसल आयोग ने पीलीभीत में अनुसूचित जाति के किसान की आत्महत्या को लेकर छपी खबरों का संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। आयोग के मुताबिक प्रथमदृष्टया सामने आया कि स्थानीय पुलिस ने किसान को उसकी नाबालिग बेटी के अपहरण और बलात्कार के मामले में आरोपियों के साथ समझौता करने के लिए मजबूर किया।
आरोपियों ने लड़की का नौ मई को अपने पिता से खेत पर मिलने जाने के दौरान अपहरण किया था। उसके पिता ने अगले दिन पुलिस में शिकायत की, हालांकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय कुछ रिश्तेदारों की मौजूदगी में पीड़िता और आरोपी व्यक्तियों के बीच समझौता करा दिया। पुलिस ने पीड़िता के माता-पिता को सूचित किए बिना केस बंद कर दिया। इससे परेशान होकर लड़की के पिता ने 17 मई को आत्महत्या कर ली थी।