धरना-प्रदर्शन के दौरान सड़क घेरकर यातायात अवरुद्ध करने के मामले में तत्कालीन बसपा महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, नौशाद अली, अतर सिंह और मेवालाल गौतम को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंबरीश कुमार श्रीवास्तव ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने किसी भी आरोपी को कैद की सजा से दंडित नहीं किया लेकिन प्रत्येक को ढाई-ढाई हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा है कि जुर्माने की रकम जमा न करने पर आरोपियों को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास दिया जाएगा।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के समय आरोपी नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, नौशाद अली, अतर सिंह राव और मेवालाल गौतम कोर्ट में हाजिर थे। कोर्ट ने सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार देने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए मामले को दोपहर बाद पेश करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से कहा गया कि वह वरिष्ठ नागरिक हैं और राजनीतिक व्यक्ति होने के कारण उन्हें कम से कम सजा दी जाए। जबकि अभियोजन की ओर से एपीओ सोनू सिंह राठौर ने आरोपियों को अधिक से अधिक सजा देने की मांग की।
गौरतलब है कि मामले की रिपोर्ट उप निरीक्षक शिवा साकेत सोनकर ने 21 जुलाई 2016 को हजरतगंज थाने में दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि तत्कालीन भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह के बयानों के विरोध में नारेबाजी करते हुए बसपा के लगभग 4 से 5 हजार कार्यकर्ता हजरतगंज चौराहे से निकलकर विधानसभा के सामने मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। इससे आने-जाने वाले लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। विवेचना के बाद पुलिस ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत अन्य के खिलाफ 21 जून 2017 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।