प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। शहर की सड़कों के गड्ढे भरने में बजट की कमी का रोड़ा आड़े आ रहा है। पूरे शहर में 438 किमी. सड़कों पर गड्ढे हैं। पैचवर्क कर इनको चलने लायक बनाने केलिए 507 करोड़ रुपये की जरूरत है। पर, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के पास इसका दस प्रतिशत बजट भी इस काम के लिए नहीं है। शासन ने भी गड्ढों को भरने के लिए अलग से कोई बजट जारी नहीं किया। इसका असर गड्ढा मुक्त करने के काम पर पर भी दिख रहा है। काम 15 नवंबर तक पूरा किया जाना है। पर, अब महज 17 दिन ही बचे हैं। अब तक पीडब्ल्यूडी ने करीब 42 फीसदी और नगर निगम अपने हिस्से की सड़कों के 13.23 फीसदी को ही सुधार पाया है। ऐसे में मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद तय समय पर सड़कें गड्ढा मुक्त हो पाती नहीं दिख रही हैं। वहीं, बजट की कमी की वजह से लोक निर्माण विभाग ने 115 सड़कें बनाने से इनकार कर दिया है। ये गड्ढे वाली सड़कों से अलग हैं। साल 2020 में इन सड़कों को बनाने का जिम्मा पीडब्ल्यूडी को मिला था।
बात गड्ढे वाली सड़कों की करें तो 438 किमी. को दुरुस्त करने का जिम्मा लोक निर्माण और नगर निगम के पास है। इनमें से नगर निगम केस्वमित्व में जो सड़कें हैं, उनको पैचवर्क कर चलने लायक बनाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की जरूरत है। बजट की कमी के कारण नगर निगम करीब पांच करोड़ रुपये ही सड़कों के पैचवर्क पर खर्च कर रहा है। इससे करीब 175 सड़कें ही गड्ढा मुक्त हो पाएंगी। बजट की कमी को देखते हुए 14 अक्तूबर को मंडलायुक्त की अध्यक्षता में सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने केलिए हुई बैठक में पार्षद कोटे के अलावा 15वें वित्त आयोग का बजट भी खर्च करने का निर्णय लिया गया था।
वायु गुणवत्ता सुधार के मद से भी खर्च करेंगे 18 करोड़
नगर निगम अब वायु गुणवत्ता सुधार के लिए 15वें वित्त आयोग मद से मिलने वाले18 करोड़ भी सड़कों को सुधारने पर खर्च करेगा। इससे कौन-कौन सी सड़कें बनाई जाएंगी, इसकी फाइनल सूची बनाई जा रही है। जल्द ही इसे कमेटी केसामने मंजूरी के लिए लाया जाएगा।
दो साल बाद पीडब्ल्यूडी ने कहा-115 सड़कें नगर निगम अपने बजट से बनाए
सात मीटर और उससे अधिक चौड़ी सड़कें लोक निर्माण विभाग बनाएगा। शासन के इस आदेश के बाद दो साल पहले नगर निगम की ओर से 172 सड़कें लोक निर्माण विभाग को दी गई थीं। अब लोक निर्माण विभाग का कहना है कि उसे सिर्फ 57 सड़कें बनाने का ही पैसा शासन से मिला है। ऐसे में अब बची 115 सड़कों को नगर निगम अपने बजट से बनाए। इसको लेकर लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय अभियंता मनीष वर्मा की ओर से पत्र भी नगर निगम को भेजा गया है। ऐसे में पहले से ही सड़कों को बनाने के लिए बजट की कमी से जूझ रहे नगर निगम केसामने और संकट बढ़ गया है। इस बारे में नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा का कहना है कि यदि लोक निर्माण सड़कों को नहीं बनाएगा, तो नगर निगम मरम्मत कराएगा। बजट का इंतजाम किया जा रहा है। जैसे-जैसे बजट आता जाएगा, सड़कों को बनाया जाएगा।
लोक निर्माण से वापस हुईं कुछ प्रमुख सड़कें
हुसैनगंज तिराहा से लाटूश रोड
लाटूश रोड से श्रीराम रोड तिराहा
हुसैनगंज से कैसरबाग, सिटी स्टेशन होते हुए मेडिकल कॉलेज चौराहा तक
जानकीपुरम में मुलायम तिराहा होते हुए लविवि न्यू कैम्पस रोड
जानकीपुरम में मामा चौराहा से मड़ियांव गांव रोड
पुरनिया चौराहा से स्वाद रेस्टोरेंट, सेक्टर-क्यू, व रामराम बैंक चौराहा होते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा
मुंशी पुलिया चौराहा से अरविंदो पार्क होते हुए पानी गांव तक
रूमीगेट पुलिस चौकी से चौक चौराहा तक
राजाजीपुरम क्षेत्र में कोठारी बंधु पार्क से जलालपुर अंडरपास तक
बर्लिंग्टन चौराहा से कैसरबाग अशोक लॉट चौराहा
हैनीमैन चौराहा से आईआईसीएम एकेडमी होते हुए रेलवे लाइन तक
महानगर में कार्मल चौराहा से क्लासिक चौराहा तक
रिंग रोड से सहारा एस्टेट मार्ग
बालागंज चौराहा से जल निगम मार्ग हरिहर नगर तक
दुर्गापुरी तिराहे से निलमथा टैम्पो स्टैंड रोड
सीडीआरआई चौराहा से भिठौली मार्ग
फैक्ट फाइल
लोक निर्माण विभाग
लक्ष्य- 884.48 किमी.
काम हुआ-379.69 किमी.
(ये सड़कें शहर समेत पूरे लखनऊ जिले की हैं।)
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नगर निगम
लक्ष्य 170.93 किमी.
काम हुआ-22.50 किमी.
(आंकड़ा शहर की सड़कों का)
सुस्ती पर स्पष्टीकरण तलब
सड़कों को गड्ढा मुक्त किए जाने का काम तय समय 15 नवंबर तक पूरा नहीं हो पाएगा, इसकी आशंका मंडलायुक्त रोशन जैकब को भी है। उन्होंने काम धीमे होने के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश नगर आयुक्त को दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि काम को समय से पूरा कराया जाए।
अभी पूरा फोकस सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने पर
मंडलायुक्त रोशन जैकब का कहना है, अभी गड्ढा मुक्त के काम पर ज्यादा जोर है। जो बड़ी सड़कें हैं, उनको बनाने का काम बाद में किया जाएगा। अभी तय समय में सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए विभागों को अतिरिक्त बजट जुटाने को कहा गया है। 15वें वित्त व पार्षद कोटा से भी काम हो रहे हैं। जरूरत पड़ी तो शासन से भी बजट मांगा जाएगा।