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Lucknow News: खरीदारों की रकम पर कुंडली मारे बिल्डरों के खाते सीज

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लखनऊ। आशियाने का सपना दिखाकर आम जनता की जिंदगी भर की कमाई दबाए बैठे बिल्डरों (प्रमोटर) के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। अंसल, पार्थ समेत पांच डवलपर के खाते सीज कर दिए गए हैं। वहीं 88 प्रमोटर पर शिकंजा कसने की तैयारी है। इनसे 273 करोड़ रुपये वसूले जाने हैं। रेरा ने इनकी सूची जिला प्रशासन को दे दी है। वहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण और एमार एमजीएफ लैंड लिमिटेड से वसूली की गई है।

बिल्डरों ने खरीदारों को न तो मकान-फ्लैट दिया और न ही उनका पैसा वापस कर रहे हैं। लिहाजा इनसे वसूली के लिए सख्ती शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने अंसल, पार्थ इंफ्रा, श्री कोलोनाईजर्स, केजी कंस्ट्रक्शन और भव्या क्रिएटर्स के खाते सीज कर दिए हैं। श्री कोलोनाईजर्स और केजी कंस्ट्रक्शन की नीलामी की तैयारी की जा रही है। भव्या क्रिएटर्स की ओर से जो चेक दिया गया था, वह बाउंस हो गया। प्रशासन ने भव्या क्रिएटर्स के खिलाफ चेक बाउंस का केस भी दर्ज कराया है। साथ ही उसकी नीलामी के लिए कार्यवाही की जा रही है। इसके अलावा पोलार्स इंफ्रा डेवलपर्स की नीलामी बृहस्पतिवार को की जाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण से 5 करोड़ 98 लाख 65 हजार 859 रुपये और एमार एमजीएफ से 11 लाख 88 हजार 636 रुपये वसूले गए हैं।
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अफसरों की मिलीभगत से नहीं हो पाती वसूली

निवेशकों को रकम मिलने में देरी का कारण अफसर हैं। कई अफसरों ने बड़े प्रमोटर के यहां प्लाॅट खरीद लिए हैं। वसूली के लिए जब भी टीम किसी प्रमोटर के यहां जाती है, अफसरों के फोन कॉल शुरू हो जाते हैं। कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण बड़े प्रमोटर से वसूली नहीं हो पा रही है। अंसल का बैंक खाता सीज होने के बाद भी वसूली नहीं हो पा रही है। सूत्रों का कहना है कि बकायेदार की सूची में पहले नंबर पर होने के बावजूद अंसल से वसूली नहीं होने के पीछे भी कुछ अफसरों का हाथ है।
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दो हजार पीड़ित लगा रहे चक्कर



रेरा की ओर से 2081 आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) प्रशासन को भेजी गई है। इनमें कुछ प्रमोटर ने भुगतान कर दिया। हालांकि अब भी करीब 2000 पीड़ित अपने मेहनत की कमाई वापस लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में भी अक्सर ऐसे फरियादी नजर आते हैं। सूची के मुताबिक करीब 418 करोड़ रुपये वसूली होनी थी। कुछ प्रमोटर्स ने नीलामी से बचने के लिए करीब 144 करोड़ रुपये जमा कर दिए। फिर भी 273 करोड़ रुपये की वसूली होनी है।

ये हैं जनता के रुपये न लौटाने वाले



प्रमोटर बकाया राशि

अंसल 85.13

शाइन सिटी 17.17

आर संस 4.54

सहारा प्राइम सिटी 14.25

यूपी आवास एवं विकास परिषद 4.08

तुलसियानी कंस्ट्रक्शन 49.51

पार्थ इंफ्रा 15.77

ओमेगा डेवलपर्स 2.15

पोलार्स इंफ्रा डेवलपर्स 1.37

वसुंधरा लोटस 1.18

विराज कंस्ट्रक्शन 5.90

रोहतास प्रोजेक्ट्स 4.56

वेल्थ मंत्रा 6.13

प्रोप्लेरिटी होम्स 04

अवध इंफ्रा लैंड 3.41

यजदान इंफ्राकॉन 10.42

पार्श्वनाथ डेवलपर्स 02

श्री कोलोनाइजर्स 2.10

अभीष्ट डवलपर्स 2.72

आस्था इंफ्रा 2.63

लक्ष्य बिल्डमार्ट 2.06

राधे कृष्ण मार्केटिंग 1.16

क्रेटा इंफ्रास्ट्रक्चर 1.21

आशियाना इंफ्रा प्रमोटर्स 2.91

क्लेरिऑन टाउनशिप 1.19

डि्रजल कंस्ट्रक्शन 1.04

एंडेस टाउन प्लानर्स 1.78

कॉलेज ग्रुप इंफ्रा 1.31

यूनिटेक हाइटेक डवलपर्स 1.18

(नोट : आंकड़े करोड़ रुपये में। इनके अलावा अन्य प्रमोटर हैं जिनसे लाखों रुपये की वसूली होनी है )
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