फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: काम के दबाव में फिर सात डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन


लखनऊ। मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर खुले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के डॉक्टरों को नाैकरी रास नहीं आ रही है। पिछले एक सप्ताह में सात केंद्रों के डॉक्टर इस्तीफा देकर दूसरे संस्थान चले गए। खाली हुए केंद्रों पर अब तक नई तैनाती नहीं हो सकी है। बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि छह डॉक्टर मिले हैं, जिन्हें केंद्रों पर तैनात किया जाएगा।

शहर में इसी साल अप्रैल में 75 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खुले। हर केंद्र पर एक-एक एमबीबीएस की तैनाती की गई थी। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो चौपटिया, विपुलखंड-1, अर्जुनगंज, भरतनगर, दुबग्गा स्थित कुल्हड़ कट्टा, मुनेश्वरपुरम, ताड़ीखाना सेंटर पर तैनात रहे डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया। इससे इन केंद्रों पर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। वेलनेस सेंटर खुलने के आठ महीने में ही करीब 20 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं।
विज्ञापन


वजह क्या

50 हजार मिलते हैं, निजी अस्पताल दे रहे एक से डेढ़ लाख



नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर नौकरी छोड़ने वाले एक डॉक्टर ने बताया कि इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ी वजह कम वेतन है। सेंटर के डॉक्टरों को 50 हजार रुपये वेतन दिए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों की बात करें तो वहां एमबीबीएस को हर माह करीब एक से डेढ़ लाख रुपये मिल रहे हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों का लोड भी कम है। यही वजह है कि बेहतर पैकेज का विकल्प मिलते ही डॉक्टर नौकरी छोड़ देता है।

हर सप्ताह आरोग्य मेले में 150 मरीज देखने का तय कर दिया लक्ष्य



वेलनेस सेंटर पर हर सप्ताह मुख्यमंत्री आरोग्य मेला लगता है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के नोडल अफसर डॉ. आरएन सिंह ने अक्तूबर में एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि आरोग्य मेले में हर केंद्र पर 150 मरीज देखे जाएं। इसके साथ ही टीकाकरण, नसबंदी समेत दूसरे कामों में भी ड्यूटी लगा दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि इतने काम के बावजूद कम वेतन दिया जा रहा है।



सीमित संसाधन भी तोड़ रहा मनोबल

डॉक्टर बताते हैं कि कुछ सेंटरों को छोड़कर हर दिन की ओपीडी में करीब आठ से दस मरीज ही आते हैं। सेंटरों पर सीमित संसाधन हैं। कार्ड टेस्ट व सीबीसी समेत चार जांचों की सुविधा है। बाकी जांचों के लिए मरीजों को नजदीकी सीएचसी या जिला अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में मरीज यहां आने के बजाय बड़े अस्पताल की तरफ रुख करते हैं। सीमित संसाधन से भी मनोबल टूट रहा है।
विज्ञापन






छोड़ने वालों को कोई बेहतर विकल्प मिला होगा

लक्ष्य का यह मतलब नहीं है कि डॉक्टर ने 150 मरीज नहीं देखे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। जो डॉक्टर नौकरी छोड़ रहे हैं, उन्हें कोई दूसरा बेहतर विकल्प मिला होगा। जो केंद्र खाली हैं, वहां पर जल्द ही डॉक्टर तैनात हो जाएंगे।



डॉ. बीएन यादव, कार्यवाहक सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें