फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: चुक गए पैसे, ठेकेदारों ने खड़े किए हाथ, अटका सड़कों के गड्ढे भरने का काम

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रवेंद्र गुप्ता
विज्ञापन




लखनऊ। सड़कों के गड्ढे भरने के लिए नगर निगम के पास पैसे नहीं हैं। आकस्मिक कार्यों के बजट के 8 करोड़ रुपये पहले ही खर्च हो चुके हैं। ऐसे में यह विकल्प भी नहीं है। वहीं, ठेकेदारों ने बिना बकाया भुगतान के काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। गड्ढों को भरने के लिए 12 करोड़ रुपये के बजट की दरकार है। ऐसे में नगर आयुक्त कोटे से बजट का विकल्प तलाशा जा रहा है।

नगर निगम के स्वामित्व वाली करीब 244 किमी. लंबी 300 सड़कों में गड्ढे हैं। चालू वित्तीय वर्ष के बजट की बात करें तो सामान्य निधि से महापौर, नगर आयुक्त और पार्षद कोटे के अलावा आकस्मिक कार्यों के लिए आठ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। आकस्मिक कार्यों में ही सड़कों के गड्ढों को भरने का काम भी आता है। पर, पिछले चार महीने में यानी जब से पार्षद चुनकर आए हैं, यह बजट खत्म हो गया।
विज्ञापन




इसलिए आया संकट...



पार्षदों ने सिफारिश से बजट से चार गुना अधिक के कामों को स्वीकृत करा लिया

सूत्रों के मुताबिक पार्षदों ने अपने कोटे से काम कराने के बजाय जुगाड़ और सिफारिश से सामान्य कोटे से काम स्वीकृत करा लिए। आलम यह रहा कि जितना बजट था उससे चार गुना की स्वीकृति हो गई। ऐसे में अब जब आकस्मिक कार्य के तहत गड्ढों को भरने की लिए बजट की जरूरत है, तो नगर निगम का खजाना खाली है। अब पुनरीक्षित बजट पास होने पर ही बजट बढ़ाया जा सकता है। पर, पुनरीक्षित बजट अक्तूबर के अंत तक पास होगा। वहीं, गड्ढों को भरने का काम भी 30 अक्तूबर तक पूरा किया जाना है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन मुश्किल में पड़ गया है।



चल रही फाइलों को निरस्त करने की तैयारी

पार्षदों व अन्य प्रभावशाली लाेगों के दबाव में पहले नगर निगम प्रशासन ने आकस्मिक निधि से जो फाइलें स्वीकृत कर दी थीं, अब उनको निरस्त करने की तैयारी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि अभी ज्यादातर कामों के टेंडर नहीं हो पाए हैं, ऐसे में उनको निरस्त किया जा सकता है। टेंडर से पहले फाइलों पर बजट का आवंटन किया जाता है, जो अभी नहीं हुआ है। अभी सिर्फ कमिटमेंट सील (काम कराने की सहमति) ही लगी है। ऐसे में बजट से अधिक की मंजूर हुई फाइलों को निरस्त करने की भी तैयारी चल रही है।



-

बैठक में बनी रणनीति



नगर निगम ठेकेदार संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए नगर निगम अफसरों के साथ एक सप्ताह पहले बैठक हुई थी। इसमें बजट की कमी की बात आई। बैठक में कहा गया कि टेंडर हो जाएंगे, मगर फाइलों पर बजट सील (बजट आवंटन) पुनरीक्षित बजट के पास होने के बाद ही लगेगी। जब पुनरीक्षित बजट आएगा तभी बजट बढ़ाया जाएगा। ठेकेदार बगैर बकाया भुगतान के काम करने को तैयार नहीं हैं। इसको देखते हुए नगर निगम प्रशासन नगर आयुक्त कोटे से काम कराने की कवायद कर रहा है। बजट में नगर आयुक्त कोटा में 25 करोड़ रुपये के काम कराने का प्रावधान किया गया था।





पिछले साल भी आया था संकट, पार्षद कोटे से लिए गए थे पांच-पांच लाख

पिछले साल भी सड़कों के गड्ढे भरने के लिए बजट का संकट खड़ा हुआ था। उस समय सभी पार्षदों के कोटे से पांच-पांच लाख रुपये का बजट लेने की रणनीति बनी थी। पार्षदों ने तब इसका विरोध किया था। बहरहाल बाद में सहमति बनी कि जिन सड़कों का प्रस्ताव पार्षद देंगे, वही सड़कें उनके कोटे से दुरुस्त कराई जाएंगी।
विज्ञापन




-

दावा : बजट का इंतजाम हो गया है



मुख्य अभियंता नगर निगम महेश वर्मा का कहना है कि बजट का कोई संकट नहीं है। इंतजाम हो गया है। नगर आयुक्त कोटे से बजट खर्च किया जाएगा। गड्ढों को भरने पर 12 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें