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बेरोजगारों के सपनों पर डाका : निजी क्षेत्र की नौकरियों पर ठगों ने फैलाया जाल, चार लाख तक ऐंठ ले रहे

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लखनऊ। ठगों का जाल अब निजी क्षेत्र की नौकरियों पर भी फैलने लगा है। बेरोजगारी के शिकार युवाओं को अपने झांसे में फंसा ठग चार लाख रुपये तक ऐंठ ले रहे हैं। एसटीएफ ने ऐसे ही एक गिरोह के चार शातिरों को गिरफ्तार कर फर्जी काॅल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह पिछले तीन वर्षों में करीब एक हजार बेरोजगारों को ठग चुका है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि कई करोड़ रुपये इस गिरोह ने बेरोजगारों से ऐंठे हैं। पकड़े गए आरोपियों में दो इंजीनियर व दो परास्नातक हैं।



एसटीएफ को ठगी से संबंधित कुछ शिकायतें मिली थीं, जिसके आधार पर तहकीकात की जा रही थी। उसी में गिरोह का सुराग लगा। एसटीएफ डीएसपी डीके शाही ने बताया कि इंदिरानगर सेक्टर-19 के ओम अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 305 में मंगलवार रात करीब तीन बजे दबिश दी गई। यहां पर कॉल सेंटर चलते पाया गया। मौके से राजन श्रीवास्तव, राकेश शर्मा, सुरेंद्र प्रताप सिंह और सुमेंद्र तिवारी को गिरफ्तार किया गया। डीएसपी ने बताया कि चारों आरोपी नोएडा में कॉल सेंटर में नौकरी करते थे। जहां एक दूसरे से पहचान हुई थी। बाद में खुद ठगी का खेल शुरू कर दिया। मामले में गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोपी राजन व सुरेंद्र एमए पास हैं, सुमेंद्र और राकेश बीटेक पास। एसटीएफ ने दोपहर बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से वे जेल भेज दिए गए।
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ऐसे काम करता था गिराेह

वेबसाइट पर बेरोजगारों की सीवी तलाशते, जैसी नौकरी की तलाश वैसा ऑफर देते



आरोपियों ने पूछताछ में कुबूला कि वे वेबसाइट www.foundit.in की मदद से युवा बेरोजगारों की सीवी जुटाते थे। सीवी में बेरोजगार की योग्यता, एक्सपर्टीज देखते और इसके साथ ही खेल शुरू हो जाता। सीवी में दिए नंबर पर कॉल कर नौकरी का लालच देते। रजिस्ट्रेशन से लेकर इंटरव्यू की पेचीदगियां समझाते। फिर बातों-बातों में ही इंटरव्यू पास कराने के तौर-तरीके समझाते। तीर निशाने पर लगता देख इंटरव्यू पास कराने का ठेका ले लेते। जो जाल में फंस जाता, उससे कई बार ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करवा लेते थे। रकम हड़प कर मोबाइल नंबर बंद कर देते थे।

रजिस्ट्रेशन फीस से लेकर नियुक्ति पत्र तक एक से चार लाख रुपये तक ऐंठ लेते



एसटीएफ का कहना है कि आरोपी रजिस्ट्रेशन फीस लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र देने तक एक शख्स से एक से चार लाख रुपये तक ऐंठ लेते थे। तमाम ऐसे भी लोग थे, जिन्होंने बहुत छोटी रकम दी। बाद में उनको ठगी का अंदेशा हुआ तो बाकी रकम नहीं दी।



दक्षिण भारत के लोगों को सबसे ज्यादा ठगा

एसटीएफ की जांच में सामने आया कि आरोपियों के पास सबसे अधिक डाटा दक्षिण भारत के लोगों का था। इसके बारे में आरोपियों का कहना था कि वे दूर दराज के लोगों से इसलिए ठगी करते थे, जिससे ठगी के शिकार लोग उन तक आसानी से न पहुंच सकें। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को भी निशाना बनाते थे। यही नहीं जिस नौकरी में जो सैलरी होती थी, उससे काफी अधिक दिलाने का दावा करते थे। इसलिए लोग उनके जाल में आसानी से फंस जाते थे।

फर्जी आईडी पर लेते थे प्री एक्टिवेटेड सिम



डीएसपी के मुताबिक आरोपी प्री-एक्टिवेटेड सिम ही खरीदते थे। यानी सिम फर्जी आईडी पर लिए गए। एसटीएफ का कहना है कि गिरोह हजाराें नंबरों का इस्तेमाल कर चुका है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इन सिम का इस्तेमाल इसलिए करते थे, जिससे वे पकड़े न जा सकें।

तीन फ्लैट ले रखे थे किराए पर, 15 कर्मचारी बातचीत के लिए रखे थे



आरोपियों ने ओम अपार्टमेंट में तीन फ्लैट किराए पर लिए थे। इसमें फ्लैट नंबर 305, 208 और 108 शामिल है। 305 में कॉल सेंटर चलता था। अन्य दो में सभी रहते थे। पंद्रह कर्मचारियों को कॉल पर बातचीत करने के लिए रखा था, जिनको ये प्रति माह 5 से 10 हजार रुपये वेतन देते थे।
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गिरफ्तार किए गए आरोपी

- राजन श्रीवास्तव, बिसंदरपुर, मीरजापुर



- राकेश शर्मा, बनगांव गोला, गोरखपुर

- सुरेंद्र प्रताप सिंह, आचीतपुर, मान्धाता प्रतापगढ़



- सुमेंद्र तिवारी, बेहता बुजुर्ग बिलग्राम, हरदोई

ये हुई बरामदगी

तीन लैपटॉप, 70 मोबाइल फोन, अलग-अलग कंपनियों के 97 कार्ड, 141 डाटा सीट, 13 चेकबुक, एक पासबुक, 9 एटीएम कार्ड, एक एटीएम स्वैपिंग मशीन।


जानकीपुरम से लेते थे सिम, नोएडा में सरगना


एसटीएफ की तफ्तीश में सामने आया कि जानकीपुरम 60 फिटा रोड पर स्थित बालाजी मोबाइल से आरोपी प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदते थे। जिससे सिम लेते थे उसका नाम सौरभ बताया है। एसटीएफ इसकी तस्दीक कर रही है। वहीं आरोपियाें न बताया कि नोएडा निवासी कमल गुर्जर गिरोह का सरगना है। जो भी रकम आती थी उसी के खाते में आती थी। वह 30 फीसदी रकम काटकर इन सभी को देता था। पुलिस ने सौरभ और कमल को नामजद आरोपी बनाया है।
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