लखनऊ। इंदिरा गांधी नेत्र चिकित्सालय से सोमवार को बलरामपुर अस्पताल रेफर किए गए मरीज की जाम की वजह से एंबुलेंस में ही मौत हो गई। गंभीर मरीज को लेकर निकली एंबुलेंस को महज एक किमी. की दूरी तय करने में 45 मिनट लग गए। अस्पतालों के बाहर अतिक्रमण से जाम को लेकर हाईकोर्ट के नाराजगी जताने के बावजूद हालात नहीं सुधरे। नतीजा-जाम में फंसे मरीज को जान गंवानी पड़ी।
सरोजनीनगर के बेहसा गांव के रहने वाले वेद प्रकाश (75) ने कुछ दिन पहले इंदिरा गांधी नेत्र चिकित्सालय में आंख का ऑपरेशन कराया था। सोमवार को वह जांच के लिए बेटी संग अस्पताल आए थे। परचा बनवाने के बाद बेटी ने उन्हें कुर्सी पर बिठा दिया और खुद कतार में जाकर खड़ी हो गई। वेद प्रकाश कुर्सी पर बैठे-बैठे अचानक गश खाकर गिर गए। इससे वहां अफरातफरी मच गई। अस्पताल ने सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे एंबुलेंस से मरीज को बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया।
इंदिरा गांधी नेत्र चिकित्सालय से निकलते ही एंबुलेंस बारादरी पर जाम में फंस गई। वहां से निकली तो कैसरबाग में नारी शिक्षा निकेतन, सीएमओ ऑफिस के पास जाम में रेंगती रही। वहां से आगे निकली तो बलरामपुर अस्पताल के गेट के पास पहुंचकर फिर जाम में फंस गई। रूट पर जाम का आलम यह रहा कि बाइक तक नहीं निकल पा रही थीं। ऐसे में एंबुलेंस सायरन बजाती खड़ी रही। दोपहर करीब 12.15 बजे एंबुलेंस बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची। स्ट्रेचर पर मरीज को अंदर ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच की तो वेद प्रकाश के शरीर में कोई हरकत नहीं मिली। ईसीजी जांच के बाद उनको मृत घोषित कर दिया गया। बलरामपुर अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. सर्वेश सिंह ने बताया कि मरीज मृत अवस्था में लाया गया था।
दोपहर में बलरामपुर अस्पताल गेट पर जाम में कई एंबुलेंस फंसीं
बलरामपुर अस्पताल के मुख्य द्वार पर दोपहर में भीषण जाम लगा हुआ था। वाहन रेंगते हुए निकल पा रहे थे। इस दौरान जाम में फंसीं कई एंबुलेंस सायरन बजाती रहीं। वहीं अस्पताल के बगल में डफरिन अस्पताल मार्ग पर भी पूरे दिन जाम लगा रहा। वहां भी गर्भवती महिलाओं को लाने वाली एंबुलेंस जाम में रेंगती रहीं। करीब दो घंटे तक यहां तीन किमी. के दायरे में लोग जाम से जूझते रहे।
अस्पतालों के बाहर अतिक्रमण हटे तो न लगे इस तरह जाम
केजीएमयू हो या फिर बलरामपुर या सिविल अस्पताल सब जगह एक जैसा हाल
बलरामपुर और सिविल अस्पताल के बाहर अतिक्रमण की वजह से आए दिन जाम लगता है। कैसरबाग बस अड्डा और कचहरी के बाहर दोपहर में अक्सर वाहनों की कतार दिखाई देती है। हाईकोर्ट ने पूर्व में अस्पतालों के बाहर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा था। पुलिस, प्रशासन और नगर निगम ने तब कार्रवाई की थी, लेकिन कुछ दिन के बाद फिर वैसे ही हालात हो गए। यही हाल केजीएमयू के बाहर भी है। यहां लोग सड़क को घेरकर वाहन खड़े कर देते हैं। यही नहीं एंबुलेंस भी सड़क पर खड़ी रहती हैं, जिससे मरीजों को आने-जाने में दिक्कत होती है।
इसलिए शहर में लाइलाज हुई जाम की समस्या
जाम से छुटकारा दिलाने के लिए अधिकारी आए दिन कार्ययोजना बनाते रहते हैं। स्कूलों के बाहर जाम से निजात दिलाने के लिए भी कई बार बैठकें हुईं। स्कूलों को दिशानिर्देश जारी किए गए, लेकिन कार्ययोजना अमल में नहीं आ सकी। यही वजह है कि स्कूलों की छुट्टी के बाद हजरतगंज में जाम की समस्या आम है। सोमवार को वाहनों का दबाव बढ़ता है और कैसरबाग, चौक, हजरतगंज व आसपास के इलाके में राहगीरों को जाम का सामना करना पड़ता है।
डफरिन अस्पताल : मुख्य मार्ग पर पार्किंग बढ़ा रही समस्या
डफरिन अस्पताल का मुख्य मार्ग काफी सकरा है। इसके बाद भी मुख्य मार्ग पर पार्किंग स्टैंड सालों से चल रहा है। यह स्टैंड जाम की मुख्य वजह बना हुआ है। वहीं आए दिन इस मार्ग पर एंबुलेंस जाम में फंसती हैं। वहीं रोड पर ही अवैध दुकानें भी सजी रहती हैं। इससे मरीज व उनके तीमारदार हर दिन जाम में फंसते हैं।
जाम की सूचना नहीं मिली
जाम की सूचना नहीं मिली थी। एंबुलेंस के जाम में फंसने की जानकारी भी नहीं है। किसी ने इस संबंध में शिकायत नहीं की। इस बारे में पता लगाया जाएगा। सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएंगे। इसके बाद पूरा मामला स्पष्ट हो पाएगा।-आशीष कुमार श्रीवास्तव, डीसीपी ट्रैफिक