फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: डॉक्टर गूगल पर बढ़ती निर्भरता बना रही बीमार

विज्ञापन
विज्ञापन
रोली खन्ना
विज्ञापन




लखनऊ। इंटरनेट की लत के साथ ही युवा तेजी से साइबरक्रॉन्डिया नामक मानसिक बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। वे गूगल पर बीमारियों के लक्षण देखकर, पढ़कर खुद को बीमार मानने लगे हैं। कोविड के बाद व्यवहार संबंधी ये दिक्कत बहुत तेजी से बढ़ी है। ओपीडी में लगातार बढ़ते मामलों को देखने के बाद किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मानसिक रोग विभाग ने लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के मेडिकल व नॉन मेडिकल स्टूडेंट्स पर एक शोध किया है। इंटरनेट हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड साइबरक्रॉन्डिया : ए स्टडी ऑन इंडियन यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स विषयक अध्ययन में 1033 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। ये सभी स्नातक स्तर पर अध्ययनरत थे। अध्ययन करने वाली टीम में शामिल हैं केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुजीत कुमार कार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित सिंह, एमबीबीएस स्टूडेंट विभोर अग्रवाल और यशिता खुल्बे।



क्यों पड़ी अध्ययन की जरूरत



अध्ययन टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. सुजीत कुमार कार कहते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए लोगों की निर्भरता गूगल पर बढ़ी है। खांसी-बुखार की गूगल टीबी के लक्षणों से भी तुलना करता है। इसी तरह छोटे-छोटे लक्षणों पर गूगल सर्च कर लोग जो बीमारी नहीं है, उसे खुद में हुआ मानकर तनाव में आ रहे हैं। इसकी गंभीरता को इस तरह से समझें, ओपीडी में 10 में से दो मामले ऐसे आते थे, देखते-देखते ऐसे मामलों की संख्या दोगुनी से तीन गुनी तक बढ़ने लगी। पाया गया कि बीमारी को लेकर भय बढ़ा है, इसका असर जीवन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इसमें मेडिकल और नॉन मेडिकल स्टूडेंट दोनों थे। यहीं पर अध्ययन की जरूरत समझी गई।
विज्ञापन


फैक्ट फाइल

1033 युवाओं पर किया अध्ययन

70 फीसदी युवा उत्तर प्रदेश के

50 फीसदी लखनऊ के स्टूडेंट्स

30 फीसदी संख्या उत्तर भारत के कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की

53.1 फीसदी युवतियां

46.4 फीसदी युवक

58.5 फीसदी मेडिकल व पैरामेडिकल स्टूडेंट

41.5 नॉन मेडिकल कोर्स से जुड़े छात्र-छात्राएं
अध्ययन के नतीजेः


दोनों समूह स्मार्टफोन के लती होते जा रहे हैं। इसके कारण व्यवहार संबंधी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ये अलग बात है कि साइबरक्रॉन्डिया के प्रभाव के कारण चिंता, तनाव, एकाकीपन, अवसाद सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स में मेडिकल स्टूडेंट्स की अपेक्षा ज्यादा है।

मेडिकल व पैरा मेडिकल स्टूडेंट पर असर

अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ग के विद्यार्थियों में इंटरनेट की लत ज्यादा पाई गई। इसका कारण ये निकल कर आया चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े होने के कारण ये स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को विश्वसनीय सूचना स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। इस कारण दबाव में आने से बच जाते हैं, लेकिन बुरी तरह से ये इंटरनेट की लत का शिकार हैं। इसका कारण है चिकित्सा क्षेत्र में काम करने, पढ़ाई करने का कठिन से कठिन तरीका। कठिन शेड्यूल के बीच खुद को रिलैक्स करने के लिए इंटरनेट में व्यस्त रहते हैं।

अन्य विद्यार्थियों पर प्रभावः
चिकित्सा छात्रों की तुलना में सामान्य विद्यार्थियों में साइबरक्रॉन्डिया तेजी से बढ़ रहा है। ये भी इंटरनेट के लती हैं। मनगढ़ंत सूचनाओं के अविश्वनीय स्रोतों पर निर्भरता। इनमें चिंता, तनाव, एकाकीपन व अवसाद बढ़ा रही है।
विज्ञापन


उपचार, समाधान पर फोकस करना जरूरी

अध्ययन टीम का कहना है कि हमें युवाओं को इंटरनेट के सही इस्तेमाल को लेकर जिम्मेदार बनाना होगा। इसके लिए जरूरी है कि डिजिटल हेल्थ लिटरेसी को लेकर अभियान चलाया जाए और इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। हमें गूगल चिकित्सक पर निर्भरता कम करनी होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें