विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने तत्कालीन भाजपा विधायक सलिल विश्नोई को पीटने वाले कानपुर के तत्कालीन सीओ (अब सेवानिवृत्त) अब्दुल समद समेत पांच अन्य पुलिसकर्मियों को विशेषाधिकार हनन का दोषी करार दिया है। सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन से संबंधित प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को सदन में पारित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पुलिस महानिदेशक को सभी दोषी पुलिस कर्मियों को शुक्रवार को विधानसभा में मार्शल की अभिरक्षा में पेश करने के निर्देश दिए हैं। सदन में सुनवाई के बाद पुलिस कर्मियों को दंड सुनाया जाएगा। करीब 19 साल बाद पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होने जा रही है।
शून्य प्रहर में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने वर्ष 2004 में हुई घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस कर्मियों द्वारा किए गए विशेषाधिकार हनन से संबंधित प्रस्ताव रखा। इसमें कहा गया है कि विधानसभा के तत्कालीन सदस्य रहे सलिल विश्नोई की शिकायत पर विशेषाधिकार समिति ने 28 जुलाई 2005 को कानपुर के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बाबूपुरवा समेत पांच अन्य पुलिसकर्मियों को विशेषाधिकार हनन और सदन की आवमानना का दोषी करार दिया था। समिति द्वारा सभी दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित करने की संस्तुति की थी।
इससे पहले इस प्रस्ताव पर 1 व 27 फरवरी को मौजूदा विशेषाधिकार समिति की बैठक में भी चर्चा हुई थी, जिसमें सभी दोषी पुलिसकर्मियों को कारावास की सजा देने की संस्तुति की गई है। लेकिन इस पर अंतिम फैसला शुक्रवार को विधानसभा में सुनवाई में होगा।
ये पुलिस कर्मी दोषी करार
तत्कालीन सीओ अब्दुल समद के अलावा किदवई नगर (कानपुर नगर) के तत्कालीन थानाध्यक्ष ऋषिकांत शुक्ला, तत्कालीन उप निरीक्षक कोतवाली त्रिलोकी सिंह, सिपाही छोटे सिंह यादव (किदवई नगर) और काकादेव थाने में तैनात तत्कालीन सिपाही विनोद मिश्रा व मेहरबान सिंह को दोषी करार दिया गया है। सीओ को छोड़ सभी पुलिसकर्मी अभी सेवा में हैं। जबकि सीओ अब्दुल समद बाद में दूसरी सेवा में आ गए थे। वह आईएएस होकर सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
यह था मामला
विशेषाधिकार समिति को दी गई सूचना के मुताबिक कानपुर नगर जनरलगंज के तत्कालीन विधायक सलिल विश्नोई 15 सितंबर 2004 को विद्युत कटौती के विरोध में जिलाधिकारी को ज्ञापन देने जा रहे थे। उस समय तत्कालीन सीओ ने भारी पुलिस फोर्स के साथ विश्नोई को घेर लिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। विश्नोई की शिकायत के मुताबिक पुलिस बल की अगुवाई करने वाले सीओ अब्दुल समद ने कार्यकर्ताओं के साथ ही विधायक को भी लाठियों से पीटा और गालियां भी दी।
साथ में धमकी भी दिया कि देखते हैं कि विधायक क्या होता है, सदन क्या कर लेगा। उन्होंने विधायक को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा था हाथ-पैर तोड़ दो। विश्नोई की शिकायत के बाद भी कोतवाली थाने में रिपोर्ट नहीं लिखी गई थी। इस मामले को विश्नोई ने 25 अक्तूबर 2004 को विधानसभा में उठाया था, जिसे विशेषाधिकार समिति (2005-2006) को सौंप दिया गया था। इस समिति ने सभी पुलिसकर्मियों को दोषी माना था।
प्रमुख सचिव व डीजीपी को निर्देश
प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दूबे ने बताया कि प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और डीजीपी डीएस चौहान को सभी दोषी पुलिसकर्मियों को शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक हिरासत में लेकर सदन में पेश करने के निर्देश भेज दिए गए हैं। इस मामले पर सुनवाई के लिए सदन में कटघरा लगाया जाएगा, जिसके भीतर सभी पुलिसकर्मियों को खड़ा किया जाएगा। इसके बाद मामले की सुनवाई होगी।