लखनऊ में नाका पुलिस ने बृहस्पतिवार देर रात चारबाग स्टेशन से दसवीं पास फर्जी इंस्पेक्टर को दबोच लिया। चौक की तीन युवतियों ने थाने में शिकायत की थी कि कि होमगार्ड की नौकरी के नाम पर उनसे ठगी हुई है। आरोपी ने गोरखपुर में ट्रेनिंग की बात कही थी और 29 सितंबर का टिकट आनंदनगर का कटवाया था। परिजनों को साथ में न ले जाने के चलते संदेह होने पर युवतियों ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है।
अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक नाका प्रदीप कुमार के मुताबिक, आरोपी की पहचान देवरिया के भटनी हरैया निवासी जमील अहमद के रूप में हुई। नाका के एक क्लीनिक पर काम करने वाले चौक के अकबरी गेट निवासी मो. फरीद का आरोप है कि जमील पांच सितंबर को पत्नी अमरीन सुल्ताना के साथ क्लीनिक पर आया था। इस दौरान उसने खुद को इंस्पेक्टर बताते हुए बहनों की होमगार्ड की नौकरी दिलाने की बात कही थी। झांसे में आकर फरीद ने 85 हजार रुपये नकद दे दिए थे। 23 सितंबर को फरीद दोनों बहनों को बलरामपुर अस्पताल मेडिकल कराने पहुंचा, जहां मदेयगंज की दो युवतियां और आई थीं। इनसे रानी नाम की महिला ने 40 हजार रुपये लिए थे।
मानव तस्करी गिरोह से जुड़े होने की आशंका
एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक, आरोपी जमील ने महराजगंज के आनंदनगर का टिकट कराया था। जहां से नेपाल महज 30 किलोमीटर दूर है। ऐसे में मानव तस्करी गिरोह से जुड़े होने की आशंका को बल मिल रहा है। आरोपी की रिमांड ली जाएगी।
ढाई हजार की वर्दी, पांच सौ का बिल्ला
पूछताछ में आरोपी जमील ने कबूला कि इंस्पेक्टर की वर्दी महराजगंज में ही बनवाई थी। डेढ़ हजार में खाकी कपड़ा लिया और एक हजार रुपये सिलवाई दी। इसके बाद सात सौ रुपये में नेम प्लेट, कंधे के सितारे और यूपीपी लिखा बिल्ला खरीदा। उसके निशाने पर निजी अस्पताल होते थे। पुलिस के मुताबिक, जमील के मोबाइल में कई नंबर अधिकारियों के पद के नाम से सेव मिले हैं।