मुख्यमंत्री योगी ने अर्जेंटीना, बोत्सवाना, कनाडा, हंगरी, इंडोनेशिया, जापान और लिथुआनिया से आए हुए युवाओं नेताओं के साथ वार्ता की। कहा कि अमृत महोत्सव मना रहे भारत के लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया भर के युवा नेता लोकतंत्र के लिए मिलकर कार्य करेंगे तो पूरी दुनिया में मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर पाएंगे। भारत के प्राचीन ध्येय वाक्य ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के साथ दुनिया के सभी देश मिलकर काम कर रहे हैं। यहां होने जा रहे जी-20 का थीम भी ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ है। वह जेन नेक्स्ट डेमोक्रेसी नेटवर्क प्रोग्राम में सम्मिलित होने वाले प्रतिभागियों के साथ अपने आवास पर बैठक कर रहे थे।
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सीएम ने अर्जेंटीना, बोत्सवाना, कनाडा, हंगरी, इंडोनेशिया, जापान और लिथुआनिया से आए हुए युवाओं नेताओं के साथ वार्ता की। कहा कि अमृत महोत्सव मना रहे भारत के लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं। भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करने वाला उप्र कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यहां 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि है लेकिन उप्र भारत के कुल खाद्यान्न का 20 प्रतिशत उत्पादन करता है। खाद्यान्न, गन्ना उत्पादन, सब्जी और दुग्ध उत्पादन में नंबर एक पर है।
भारत से जुड़ी हैं जापान की स्मृतियां
सीएम ने कहा कि काशी का भ्रमण कर युवा नेताओं ने भारत की संस्कृतिको समझा यह अहम है। दुनिया का सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद भी भारत ने दुनिया को दिया है। जापान की स्मृतियां भारत से जुड़ी हुई हैं। भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति की भूमि हो, सिद्धि प्राप्ति की भूमि हो, उनकी महा परिनिर्वाण स्थली हो सभी में उप्र की धरती महत्वपूर्ण भूमिका रखती है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने स्वयं भारत-जापान सांस्कृतिक परिषद के माध्यम से इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया था। इंडोनेशिया की रामलीला दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अयोध्या में इंडोनेशिया से आई रामलीला पूरे उत्तर प्रदेश वासियों को मोह लेती है।
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7 वें बैच की मेजबानी कर रहा है भारत
जेन नेक्स्ट डेमोक्रसी नेटवर्क नामक एक नई पहल के रूप में भारत 22 से 31 जनवरी, 2023 तक युवा नेताओं के 7वें बैच की मेजबानी कर रहा है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा बनाई गई इस योजना में वैश्विक मंचों के युवा उभरते नेता भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, इसकी सांस्कृतिक विरासत, इसकी विकासात्मक पहलुओं का व्यापक अवलोकन करने के लिए भारत का दौरा कर रहे हैं। इसमें प्रत्येक समूह में प्रत्येक देश के दो से पांच प्रतिनिधियों के साथ लगभग सात से आठ देश शामिल हैं।