कानपुर के कैंट इलाके में मोबाइल टॉवर (सेल टॉवर ऑन व्हील्स) लगवाने के मामले में धांधली करने का सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने केस दर्ज किया है। सीबीआई ने इस प्रकरण में वर्ष 2016 से 2019 के बीच कानपुर स्टेशन मुख्यालय के स्टेशन कमांडर रहे बिग्रेडियर नवीन सिंह, उनके स्टाफ अफसर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल आरपी राम, कर्नल दुष्यंत सिंह और टावर लगाने वाली लखनऊ की कंपनी इंडस टावर्स लिमिटेड को नामजद किया है। सीबीआई ने तीनों सैन्य अफसरों के लखनऊ कैंट स्थित आवास और कंपनी के विभूति खंड के बीबीडी टॉवर स्थित कार्यालय पर रविवार को छापा मारकर अहम सुबूत जुटाए है।
बताते चलें कि बिग्रेडियर नवीन सिंह वर्तमान में लखनऊ में तैनात है। वहीं, बाकी दोनों सेना के अफसर भी लखनऊ में ही रहते हैं। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक जांच एजेंसी को विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि बिग्रेडियर नवीन सिंह ने कानपुर में तैनाती के दौरान नियम विरुद्ध तरीके से सात मोबाइल टॉवर लगाने का काम लखनऊ की इंडस टॉवर्स लिमिटेड कंपनी को सौंपा था।
यह कार्य कराने की जिम्मेदारी कैंटोनमेंट बोर्ड की थी। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2018 में सर्कुलर के जरिए दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बिग्रेडियर नवीन सिंह ने रक्षा मंत्रालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। उन्होंने मोबाइल टॉवर लगाने के लिए जगह चिन्हित करने को बोर्ड का गठन भी नहीं किया।
टॉवर लगने पर मिलने वाला किराया सरकारी खजाने में जमा नहीं हुआ। इस किराए को आरोपी सैन्य अफसरों द्वारा हड़पने की आशंका जताई जा रही है। इससे आशंका जताई गई कि सेना के अफसरों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इंडस टॉवर लिमिटेड को उपकृत किया और कंपनी से अनुचित लाभ लिया।
ट्रायल के बाद जारी होनी थी निविदा
जांच में सामने आया कि स्टेशन कमांडर के स्टाफ अफसर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल आरपी राम ने छह माह बाद निविदा जारी करने की बात कहकर ट्रायल के तौर पर इंडस टॉवर्स लिमिटेड को काम दिया, जिसके बाद दो स्थानों पर टॉवर लगाए गए। इसके बाद उन्होंने बिग्रेडियर नवीन सिंह की अनुमति लेकर सातों जगह टॉवर लगाने का काम दे दिया। कंपनी ने अगस्त, 2019 में किराए के 26,40,750 रुपये जमा कराए, जबकि टॉवर्स की स्थापना अगस्त, 2018 में हुई थी।
बता दें कि रक्षा मंत्रालय के निर्देशों में किराए की रकम को एडवांस जमा कराने को कहा गया था। जांच में यह भी सामने आया कि इंडस टॉवर्स ने इस कार्य के लिए 8 सितंबर 2016 को प्रस्ताव दिया था। इस दौरान एयरटेल और जियो ने भी अपने प्रस्ताव दिए थे, जिनके बारे में उच्चाधिकारियों को गलत रिपोर्ट प्रेषित की गई थी।
सीबीआई ने की थी आकस्मिक चेकिंग
इन आरोपों की जांच के लिए सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने 30 अगस्त 2019 को सेंट्रल कमांड के अधिकारियों के साथ कानपुर कैंटोनमेंट बोर्ड इलाके की आकस्मिक चेकिंग भी की थी। जांच में इंडस टॉवर्स लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने मोबाइल टॉवर लगाने के लिए कोई किराया (लीज रेंट) नहीं जमा कराया था। वह सीबीआई को कोई दस्तावेज भी मुहैया नहीं करा सके थे। इससे साफ हो गया कि इंडस टॉवर्स लिमिटेड ने सेना के अधिकारियों से साठगांठ कर काम लिया था।