योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में एक और कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। बस्ती के सड़क घपले में दो तत्कालीन सहायक अभियंता (एई) अरविंद कुमार आर्या और विनय कुमार राम को बर्खास्तगी का निर्णय उच्चस्तर पर ले लिया गया है। प्रदेश सरकार शीघ्र ही स्पष्ट संस्तुति के साथ अपने निर्णय को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को भेजेगी। इस संबंध में औपचारिक आदेश उसके बाद ही जारी होगा।
वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत की। ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। अमर उजाला ने सिलसिलेवार इस मामले का प्रमुखता से खुलासा किया। इस पर मुख्यालय ने जांच कराई तो 43.95 करोड़ रुपये का घपला मिला। कहीं बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के ही सड़क निर्माण दिखा दिया गया और कहीं काम कराए बिना ही भुगतान ले लिया गया। इस मामले में दोषी एक्सईएन आलोक रमण को योगी सरकार-1 में ही बर्खास्त कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट में दो सहायक अभियंता विनय कुमार राम और अरविंद कुमार आर्या को भी दोषी ठहराया गया था। इस बीच अरविंद कुमार आर्या अधिशासी अभियंता के पद पर प्रमोशन भी पा गए। वर्तमान में दोनों पीडब्ल्यूडी मुख्यालय पर संबद्ध हैं।
अब सरकार ने विनय कुमार राम और अरविंद कुमार आर्या को बर्खास्त करने का निर्णय ले लिया है। नियमानुसार, इस संबंध में औपचारिक आदेश यूपीपीएससी का मत लेने के बाद ही जारी हो सकता है। इसलिए शासन संबंधित फाइल को यूपीपीएससी को भेजने की कार्यवाही कर रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस वाली सरकार है। बस्ती के सड़क घपले में दोषी मिले दोनों तत्कालीन सहायक अभियंताओं को बर्खास्त करने का निर्णय हो चुका है।
-जितिन प्रसाद, मंत्री पीडब्ल्यूडी