एटीएस की गिरफ्त में आई नक्सली तारा देवी ने बहुचर्चित मधुबन बैंक डकैती कांड नक्सलियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। इस घटना में नक्सलियों ने पहली बार शहर में अत्याधुनिक असलहों से फायरिंग करते हुए बैंक और बाजार को लूटा था। इस घटना में बिहार पुलिस के दो जवान शहीद तथा कई घायल हुए थे। इस कांड में तारा देवी भी नक्सली सतीश उर्फ रामप्रवेश बैठा उर्फ रविजी के साथ गिरफ्तार हुई थी। तारा देवी के खिलाफ दो मुकदमे भी दर्ज हो चुके है।
वहीं, एटीएस की गिरफ्त में आया लल्लू राम वर्ष 2002 में सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़कर प्रतिबंधित पत्रिका जनज्वार की छपाई एवं नक्सल विचारधारा के प्रचार प्रसार करने पर वर्ष 2004 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जमानत मिलने पर वह संगठन के प्रमुख नेताओं के निर्देश पर पूर्वांचल में भाकपा (माओवादी) के लिए काम करने वाले संगठनों, सोनभद्र में किसानों, मजदूर, छात्र एवं दलित, आदिवासी, महिलाओं की भीड़ जुटाने, नए सदस्य बनाने चंदा जमा करने तथा संगठन के संदेशों को लोगों तक पहुंचाने का काम करता है। लल्लू के पास प्रमोद मिश्रा का संदेश थाना दुबहड़ के बयासी निवासी टोनी राजभर लेकर आता है। लल्लू राम के खिलाफ भी दो मुकदमे दर्ज रहे है। वहीं सत्यप्रकाश इन सभी में सबसे ज्यादा शिक्षित है और लैपटॉप चलाने में माहिर होने के साथ अच्छा वक्ता भी है। वह किसानों का एक संगठन बनाकर उसकी आड़ में बैठकें करता है। वह संगठन के उद्देश्यों को पर्चे के माध्यम से लोगों को बताता है। वह भारत सरकार के खिलाफ योजना के तहत बड़ा हिंसक आंदोलन व हथियारबंद लड़ाई छेड़ने की योजना पर काम कर रहा था।
सुब्रमण्यम का संदेशवाहक है राजभर
राममूरत राजभर वर्ष 2005 से भाकपा (माओवादी) के शीर्ष सदस्य वाराणसी निवासी सुब्रमण्यम के संदेशवाहक के रूप में काम कर रहा है। वह नक्सली संगठन से जुड़े लोगों को अपने घर पर शरण देता है। साथ ही अपने घर पर बैठकों का आयोजन करता है। इसके अलावा विनोद साहनी का भाई संजय साहनी बिहार के भभुआ में असलहों के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है। वह अपने भाई की जगह लेने के लिए पूर्वांचल एरिया एडहॉक कमेटी को मजबूत करने के लिए बैठकों में शामिल होता था।
मोबाइल से नहीं करते हैं बात
जांच में सामने आया कि ये सभी केंद्रीय कमेटी के सदस्यों से बातचीत करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते है। इसकी जगह हमेशा कोई न कोई संदेशवाहक, पर्ची, मेमोरी कार्ड, पेन ड्राइव के माध्यम से संदेशों को भेजते है। इन सभी के खिलाफ एटीएस के थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इनको पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए एटीएस अदालत से अनुरोध करेगी, जिसके बाद केंद्रीय कमेटी के सदस्यों की तलाश की जाएगी।