भाजपा और सरकार का एक बड़ा वर्ग अपर्णा को टिकट देकर राजधानी की महापौर बनाने का पक्षधर है। वहीं भाजपा के वैश्य नेताओं ने प्रमुख कारोबारी विराज सागर दास की मां अल्का दास को टिकट दिलाने की पैरवी शुरू कर दी है। अल्का दास 2017 में भी प्रबल दावेदार थी।
लखनऊ में महापौर का पद लगातार दूसरी बार महिला के लिए आरक्षित होते ही महिला दावेदारों के बीच टिकट की दौड़ शुरू हो गई है। महिला दावेदारों में सपा संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु अपर्णा यादव बिष्ट और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अखिलेश दास की पत्नी अल्का दास का नाम प्रबल दावेदारों में सामने आया है।
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2017 नगरीय निकाय चुनाव में राजधानी में महापौर पद महिला के लिए आरक्षित था। निकाय चुनाव 2023 के लिए 5 दिसंबर 2022 को जारी अनंतिम सूची में लखनऊ महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित था। सामान्य वर्ग में महापौर पद के लिए कई दिग्गज दावेदार थे। दावेदार बीते दो महीने से लखनऊ से दिल्ली तक बड़े नेताओं के यहां हाजिरी लगा रहे थे। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर बृहस्पतिवार को जारी अनंतिम आरक्षण सूची में लखनऊ महापौर का पद एक बार फिर महिला के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में चार पांच महीने से मशक्कत कर रहे दावेदारों के सपने ध्वस्त हो गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2022 से पहले भाजपा ने पूरे दमखम से अपर्णा यादव को भाजपा में शामिल कराया था। अपर्णा को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया। करीब एक साल बीतने के बाद भी उनका सरकार या संगठन में किसी महत्पूर्ण पद पर समायोजन नहीं हुआ है। स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद अपर्णा का सपा में लौटने की संभावनाएं भी लगभग समाप्त हो गई है। ऐसे में भाजपा और सरकार का एक बड़ा वर्ग अपर्णा को टिकट देकर राजधानी की महापौर बनाने का पक्षधर है। वहीं भाजपा के वैश्य नेताओं ने प्रमुख कारोबारी विराज सागर दास की मां अल्का दास को टिकट दिलाने की पैरवी शुरू कर दी है। अल्का दास 2017 में भी प्रबल दावेदार थी।
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महिला दावेदारों में निवर्तमान महापौर संयुक्ता भाटिया फिर से दावेदारी करने में जुट गई हैं। उनके साथ उनकी पुत्रवधु रेशू भाटिया भी दावेदार मानी जा रही हैं। भाजपा अवध क्षेत्र की क्षेत्रीय उपाध्यक्ष श्वेता सिंह और राष्ट्रपति पदक विजेता सची सिंह भी महापौर पद की दावेदार हैं। सची सिंह बेसहारा बच्चों को आश्रय देने सहित अन्य समाज सेवा के कार्य में सक्रिय रहती हैं। सची सिंह राष्ट्रपति पदक विजेता, अनाथ बच्चों की सेवा से जुड़ी हैं। वहीं राजधानी के कुछ विधायक भी अपनी पत्नी या बहन के लिए टिकट मांग सकते हैं। उनका तर्क है कि जब पंचायत चुनाव में विधायक और मंत्रियों के पत्नी बच्चों को टिकट दिया गया था तो महापौर में टिकट क्यों नहीं मिल सकता है।