सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से 9 से 15 अगस्त तक अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आम लोगों को समाजवादियों के साथ आगे आना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा और आरएसएस में राष्ट्रध्वज के प्रति कभी सम्मानभाव नहीं रहा है। उन्होंने सवाल किया कि संघ के नागपुर मुख्यालय में राष्ट्रध्वज क्यों नहीं फहराया जाता?
अखिलेश ने कहा कि एक सप्ताह का यह पर्व स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृति, शहीदों को नमन तथा संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था। कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे समाजवादियों ने ही भारत छोड़ो आंदोलन की बागडोर संभाली थी। अब यह जिम्मेदारी आम जनता की है।
लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों को बचाने का लेंगे संकल्प
नौ से 15 अगस्त तक घरों में तिरंगा फहराने के अभियान के पीछे सपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता से जुड़ाव की रणनीति है। इस दौरान लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों को बचाने का सपाई संकल्प भी लेंगे। रणनीतिकारों का मानना है कि सात दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम से जनता में जागरूकता आएगी। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को समझाया जाएगा कि भाजपा सरकार की नीतियों से लोगों को कितनी समस्याएं हो रही हैं। इस दौरान लोगों को पार्टी से भी जोड़ा जाएगा।
लुल मॉल के विवाद पर अखिलेश ने कसा तंज
लुल मॉल में नमाज पढ़ने को लेकर शुरू हुए विवाद में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कूद गए हैं। उन्होें ट्वीट कर तंज कसा। लिखा कि अब तो मान्यवर स्वयं कह रहे हैं कि माॅल पर कोई राजनीति कर रहा है। जनता कह रही है जब लगाम आपके हाथ में है तो और कौन इस सत्ता का सूत्रधार हो सकता है। या फिर इस सत्ता के धागे किसी और के हाथ में हैं।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस ट्वीट के साथ एक वीडियो भी पोस्ट किया है जिसमें जगद्गुरु परमहंस दास लुल मॉल पहुंचे हैं और वहां लखनऊ पुलिस से उनकी कहासुनी हो रही है। मालूम हो कि लखनऊ का लुल मॉल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां नमाज पढ़ने को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।