प्रदेश में बेसिक के विद्यालयों के शिक्षक इन दिनों क्लास में पढ़ाने से ज्यादा समय मोबाइल में बिता रहे हैं। कारण, मोबाइल में वह अपना मनोरंजन नहीं कर रहे बल्कि विभागीय डाटा फीडिंग में लगे हुए हैं। सुबह बच्चों की फोटो अपलोड करने से लेकर शुरू हुई उनकी दिनचर्या शाम को डाटा फीडिंग के साथ ही समाप्त हो रही है। ऐसे में उन्हें पढ़ने-पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है।
विभाग से नहीं मिला सीयूजी न ही कोई मोबाइल
खास यह कि इन सारे एप के संचालन व डाटा फीडिंग के लिए शिक्षकों को विभाग से न तो सीयूजी नंबर दिया गया है, न ही मोबाइल मिला है। यह पूरा काम वे अपने मोबाइल और डाटा से करते हैं। ग्रामीण इलाकों में खराब नेटवर्क भी एक बड़ा मुद्दा है। कई बार एक ही डाटा फीड करने में काफी समय लगता है। कुछ शिक्षक तो कार्यवाही के डर से रात में घर जाकर भी डाटा फीडिंग का काम पूरा करते हैं।
ऐसे कैसे होगी निपुण लक्ष्य की प्राप्ति
केंद्रीय योजना के तहत प्रदेश में निपुण लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभाग काफी जोर-शोर से कोशिश कर रहा है। किंतु एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर शिक्षक सुबह से शाम तक डाटा फीडिंग में ही लगा रहेगा तो वह बच्चों को कब समय देगा? अगर वह बच्चों को समय नहीं देगा तो निपुण लक्ष्य की प्राप्ति कैसे होगी?
विभागीय काम के लिए लगभग एक दर्जन एप शिक्षक अपने निजी मोबाइल व डाटा प्रयोग करके करते हैं। ऐसे में शिक्षक एक मशीन बन कर रह गया है, जबकि शिक्षक का मूल कार्य शिक्षा देना है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क न होना भी एक बड़ी समस्या है। डाटा फीडिंग के लिए ब्लॉक, न्याय पंचायत स्तर पर कर्मचारी लगाने चाहिए।
-विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक स्नातक एसोसिएशन उप्र
विभाग की ओर से चलाए जा रहे एप शिक्षण से ही संबंधित है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए यह शुरू किए गए हैं। शिक्षकों को पढ़ाई के साथ यह आधुनिक शिक्षा से भी जोड़ते हैं। सीयूजी नंबर देने आदि को लेकर शिक्षक संगठनों ने प्रत्यावेदन दिया है। इस पर शासन सकारात्मक तरीके से विचार करेगा।