लखनऊ। निवेशक सम्मेलन के दौरान मर्करी हॉल में प्रवेश से पहले एक पुरानी सी स्कूटर लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। कानपुर से आए मोटर मेकेनिक वीरेंद्र शुक्ला और सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी राजेश सिडाना हर किसी को इसकी खासियत से रूबरू करवा रहे थे। वीरेंद्र कहते हैं, पुराने वाहन जाएंगे कहां, आज ये बड़ा सवाल है।सोचने वाली बात है कि इतना कचरा कहां इकट्ठा होगा। वैसे ही हमारा पर्यावरण तमाम तरह के कचरों से अटा पड़ा है। पांच साल पहले हमने इस सबको लेकर एक जागरूकता अभियान शुरू किया। हम लोग लोगों को बता रहे हैं कि पेट्रोल से चलने वाले पुराने स्कूटर को इलेक्ट्रॉनिक में बदलवाएं। हम खुद ये काम करते हैं। इसपर करीब 50 हजार रुपये के लागत आती है। इस पूरे जागरूकता अभियान का ताना-बाना बुनने वाले राजेश सिडाना कहते हैं,सेवानिवृत्ति केबाद खुद को कुछ रचनात्मक कामों में व्यस्त करने की जद्दोजहद ने हमें यह काम करने को प्रेरित किया।