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UP : छात्रवृत्ति हड़पने के लिए संस्थानों ने छात्रों से कराया एग्रीमेंट, न पढ़ाई हुई न परीक्षा, सीधे डिप्लोमा

Fri, 12 May 2023 05:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा सूरज शुक्ला, लखनऊ

सार

संस्थानों ने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (पीजीडीएम) कोर्स में बड़ा खेल किया है। छात्रों के दाखिले लिए और उनसे एक एग्रीमेंट कराया कि उनको फीस नहीं देनी होगी, उसके एवज में उनकी छात्रवृत्ति संस्थान लेगा।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दो सौ करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। संस्थानों ने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (पीजीडीएम) कोर्स में बड़ा खेल किया है। छात्रों के दाखिले लिए और उनसे एक एग्रीमेंट कराया कि उनको फीस नहीं देनी होगी, उसके एवज में उनकी छात्रवृत्ति संस्थान लेगा। यही नहीं संस्थानों ने न पढ़ाई कराई और न ही परीक्षा। उन्हें सीधे डिप्लोमा थमा दिया और छात्रवृत्ति की रकम हड़प ली।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद शासन के आदेश पर बीते 30 मार्च को हजरतगंज थाने में इस घोटाले की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें दस संस्थानों के अधिकारी व फिनो बैंक के अफसर आरोपी हैं। ईडी अपने स्तर से तफ्तीश कर तीन आरोपियों को जेल भेज चुका है। कमिश्नरेट पुलिस की एसआईटी भी केस की विवेचना कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि पीजीडीएम कोर्स में होम सेंटर की व्यवस्था है। इसलिए सबसे अधिक खेल इसी में किया गया। संस्थानों ने दाखिले के वक्त ही ओबीसी, एससी-एसटी व दिव्यांग छात्रों को बताया कि उनका जीरो फीस पर एडमिशन होगा, जो उनकी छात्रवृत्ति आएगी वह संस्थान रखेगा। इस पर छात्र भी राजी हो गए। फिर संस्थान ने छात्रों से एग्रीमेंट कराया और आसानी से उनके खाते खुलवाए। लेकिन खातों का संचालन अपने पास रखा। इसमें छात्रवृत्ति आती रही और वे हड़पते गए। जांच टीम ने ऐसे एग्रीमेंट समेत अन्य कई अहम दस्तावेज जुटाए हैं।
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अब तक 12 हजार छात्रों की जानकारी
अब तक करीब 12 हजार एंग्रीमेंट वाले छात्रों के बारे में जानकारी जुटा ली गई है। यह संख्या और बढ़ सकती है। जांच के दायरे में 2015-16 से 2022 तक की छात्रवृत्ति है।

छात्रों का मुंह बंद कराने के लिए बांटे पैसे
छात्रवृत्ति हाड़पने को लेकर विद्यार्थी कभी सवाल न उठाएं, इसके लिए संस्थानों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पहले जीरो फीस पर एडमिशन लिया। जब छात्रवृत्ति आई तो आठ से दस हजार रुपये भी उनके खातों में भेज दिए और मोटी रकम खुद हड़प ली। छात्रवृत्ति समाज कल्याण विभाग और केंद्र के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से आई। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से प्रति छात्र 1.57 लाख रुपये छात्रवृत्ति ली गई।

सूत्रों के मुताबिक अब तक की जांच में हाइजिया संस्थान का प्रशासन छात्रवृत्ति घोटाले का मास्टरमाइंड है। खेल की शुरुआत उसी ने की। इसमें अफसरों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत रही। फर्जीवाड़ा सिर्फ छात्रवृत्ति ही नहीं बल्कि शुल्क प्रतिपूर्ति में भी किया गया।

इन संस्थानों पर है एफआईआर

  • एसएस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मामपुर लखनऊ
  • ओरेगॉन एजुकेशनल सोसाइटी, कुर्सी रोड विकास नगर लखनऊ
  • हाइजिया कॉलेज ऑफ फार्मेसी, लखनऊ
  • हाइजिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी/सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, लखनऊ
  • लखनऊ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड एजुकेशन, लखनऊ
  • डॉ. श्री ओम प्रकाश गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, फर्रुखाबाद
  • आरपीपी इंटर कॉलेज, हरदोई
  • ज्ञानवती इंटर कॉलेज, हरदोई
  • जगदीश प्रसाद वर्मा, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, हरदोई
  • डॉ. भीमराव अंबेडकर फाउंडैशन एंड जीविका कॉलेज ऑफ फार्मेसी, हरदोई
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