आयकर निरीक्षक के फर्जी भर्ती मामले में विभाग में तैनात प्रशासनिक अधिकारी एसके श्रीवास्तव को हजरतगंज पुलिस ने उसके जानकीपुरम सेक्टर-एच आवास से गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसने टीम को अर्दब में लेने की कोशिश की, लेकिन गैर जमानती वारंट देख होश उड़ गए। देर शाम को आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। आरोपी के खिलाफ सीबीआई भी जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, फर्जीवाड़े का खेल इसी प्रशासनिक अधिकारी की शह पर आयकर मुख्यालय के कमरा नंबर 329 से खेला जाता था। मास्टरमाइंड प्रियंका मिश्रा इसकी काफी करीबी बताई जाती है। इसकी पुष्टि दो महीने की कॉल डिटेल निकालने पर हुई। सामने आया कि एसके श्रीवास्तव व प्रियंका के बीच 50 बार बात हुई। यह बातचीत दो से 12 मिनट तक की थी। दोनों के बीच बैंक खातों में लेनदेन की भी पुष्टि हुई है।
एसीपी हजरतगंज अरविंद वर्मा के मुताबिक, आयकर विभाग में निरीक्षक पद पर फर्जी भर्ती का खुलासा 22 नवंबर को हुआ था। कई बेरोजगारों को नियुक्ति पत्र देने के लिए प्रत्यक्ष कर भवन बुलाया गया था। मौके से प्रियंका मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने शक्ति भवन में तैनात संविदा बिजलीकर्मी सूरज मिश्रा को गिरफ्तार किया था। फिर लक्ष्मी नारायण और गाजियाबाद के विजयनगर निवासी सुरेंद्र कुमार को दबोचा था। सुरेंद्र नौकरी के इच्छुक युवकों को तलाशता था और प्रियंका से मुलाकात कराता था, जबकि सूरज व लक्ष्मी नारायण जाली नियुक्ति पत्र बनाकर देते थे।
विवेचना के दौरान एसके श्रीवास्तव की कुंडली खंगाली तो पिकप भवन की पांचवीं मंजिल पर स्थित आयकर आयुक्त कार्यालय में तैनात प्रशासनिक अधिकारी एसके श्रीवास्तव की भूमिका पाई गई। आरोपी के खिलाफ काफी सबूत जुटाने के बाद कार्रवाई की।
प्रशासनिक अधिकारी ने ही प्रियंका को दिलाया था मुख्यालय में प्रवेश
पुलिस की जांच में सामने आया है कि पिकप भवन में तैनात प्रशासनिक अधिकारी ने ही प्रियंका को मुख्यालय में प्रवेश दिलाया था। मुख्य आरोपी प्रियंका मिश्रा ने आयकर निरीक्षक बनाने के नाम पर 100-125 लोगों को शिकार बना चुकी है। यह बात उसने कुबूली भी थी। उसके गिरोह का नेटवर्क लखनऊ से दिल्ली तक फैला है।