पैदल चलने वालों को सहूलियत और आवागमन को आसान बनाने के जिस मकसद के साथ सीएम ग्रिड में बनाई जा रही सड़कों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं वह पूरा होता नहीं दिख रहा है। योजना में शामिल सड़कों के फुटपाथ और सड़कों पर उसी तरह कब्जे हैं जैसे पहले थे। अमर उजाला ने सोमवार को योजना में शामिल सड़कों की पड़ताल की तो अतिक्रमण और आवागमन में झंझट के हाल वैसे ही दिखे जैसे पहले थे।
सीएम ग्रिड योजना में सड़कों को नए सिरे से संवारा जा रहा है। जिसमें सबसे अधिक इस बात पर दिया गया है कि पैदल चलने वालों को सहूलियत रहे। इसी के लिए फुटपाथ को तोड़कर नए सिरे से बनाया गया है। उनको ऊंचा भी किया गया है। लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगाई गई हैं मगर यह सब बेकार साबित हो रहा है क्योंकि फुटपाथ पर ठेले-खोमचे वालों का कब्जा है। पूरा बाजार उन्हीं पर लग रहा है और उसके बाद सड़क पर गाड़ियां खड़ी हो रही हैं।
ऐसे में सिर्फ सड़क नई दिख रही है बाकी जो फुटपाथ लोगों के चलने के लिए संवारा गया वह सिर्फ ठेले-गुमटी वालों का ही स्थायी कब्जा बनकर रह गया है। यह तब है जबकि योजना में शामिल सड़कों को लेकर शासन का यह साफ आदेश है कि यह नो-वेडिंग जोन रहेंगे। यानी इन पर कोई ठेला-गुमटी या दुकान नहीं लगेगी। ऐसे में पूरी योजना फेल साबित हो रही है।