फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow : 19 जिलों के डीएम ने नहीं दिया  खर्च का हिसाब, रोकी गई राशि, करोड़ों रुपया लैप्स

Sun, 09 Apr 2023 04:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, लखनऊ

सार

इससे वित्त वर्ष 2022-23 में इन्हें इस मद में मिलने वाली दूसरी किस्त रोक दी गई। 31 मार्च तक हिसाब न देने की वजह से इन्हें मिलने वाला 11.50 करोड़ रुपये लैप्स हो गया है।
विज्ञापन
यूपी सचिवालय
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के 19 जिलों के जिलाधिकारियों ने क्रिटिकल गैप फंड (तात्कालिक जरूरत के काम) के पुराने खर्च का ब्योरा नहीं दिया। इससे वित्त वर्ष 2022-23 में इन्हें इस मद में मिलने वाली दूसरी किस्त रोक दी गई। 31 मार्च तक हिसाब न देने की वजह से इन्हें मिलने वाला 11.50 करोड़ रुपये लैप्स हो गया है।

विज्ञापन


जिलों में स्थानीय आवश्यकताओं को तत्काल पूरा करने के लिए विभिन्न विकास कार्यों के लिए क्रिटिकल गैप्स मद के तहत एक से डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इस राशि का उपयोग तय प्रक्रिया के अनुसार जिलाधिकारी अपने स्तर से ही करते हैं। 40 बड़े जिलों को 1.50-1.50 करोड़ रुपये, जबकि 35 छोटे जिलों को 1-1 करोड़ रुपये देने की व्यवस्था है। यह राशि दो किस्तों में दी जाती है। वित्त वर्ष 2022-23 की भी पहली किस्त पिछले वर्षों की तरह पहली छमाही के अंदर सितंबर में जारी कर दी गई। 

पहली किस्त में बड़े जिलों को 75 लाख रुपये व छोटे जिलों को 50 लाख रुपये दिए गए। शासन ने इन जिलों को दूसरी किस्त देने की कार्यवाही शुरू की तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने पिछले वर्षों में दी गई राशि के खर्च का ब्योरा तलब कर लिया। पता चला कि तमाम जिलों में वित्तीय वर्ष 2007-08 से उपयोग की गई राशि का हिसाब-किताब ही नहीं दिया था।
विज्ञापन


इसके बाद उच्च स्तर से निर्देश दिया गया कि जब तक पिछले वर्षों में मिली राशि का हिसाब नहीं दिया जाता, किसी भी जिले को दूसरी किस्त जारी नहीं की जाएगी। आनन-फानन में जिलों ने हिसाब-किताब भेजने की कार्यवाही शुरू की। बीते मार्च माह तक जिन 56 जिलों ने हिसाब भेजा, उनकी दूसरी किस्त जारी कर दी गई। बाकी 19 जिलों का भुगतान नहीं किया गया। 

जिन 19 जिलों की राशि रोकी गई, उनमें आठ जिले 1.5-1.5 करोड़ और 11 जिले 1-1 करोड़ पाने वाले हैं। इस तरह इन जिलों को राशि जारी ही नहीं की गई। प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि कई जिलों ने कुछ वर्षों का हिसाब भेजा, लेकिन कई वर्षों का नहीं भेज पाए। ऐसे जिलों का भुगतान नहीं किया जा सका।

क्रिटिकल गैप का नियमित नहीं मांगा जाता हिसाब
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्रिटिकल गैप फंड के कार्यों की पहचान से कार्य की स्वीकृति, भुगतान व सत्यापन तक की पूरी कार्यवाही डीएम के ही स्तर से होती है। ये बहुत छोटे-छोटे काम होते हैं, जिनकी मंजूरी शासन से लेने की जरूरत नहीं होती है। लिहाजा, इनका नियमित हिसाब भी नहीं मांगा जाता था। हालांकि, योजना के नियमों में व्यवस्था है कि कार्यवार वित्तीय व भौतिक प्रगति की सूचना तय प्रारूप पर आवश्यक रूप से माह की 7 तारीख तक नियोजन विभाग को दी जाएगी। इसके अलावा स्वीकृत राशि प्रत्येक दशा में 31 मार्च तक उपयोग कर ली जाएगी और इसका पूरा लेखाजोखा नियोजन विभाग को 31 मार्च तक उपलब्ध कराया जाएगा। मगर, यह व्यवस्था लंबे समय तक नजरंदाज होती रही।

इन 19 जिलों ने नहीं भेजा खर्च का ब्योरा

  • 1.50 करोड़ पाने वाले जिले : गोंडा, गोरखपुर, रायबरेली, जौनपुर, सहारनपुर, बलिया, आजमगढ़, जालौन।
  • 1 करोड़ पाने वाले जिले : वाराणसी, अंबेडकरनगर, बलरामपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, फिरोजाबाद, संभल, भदोही, फर्रुखाबाद, मऊ, और कौशांबी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें