प्राइवेट प्ले स्कूलों की स्थापना, संचालन व उनकी मनमानी रोकने के लिए केंद्र सरकार के स्तर से बनाए गए दिशानिर्देशों पर शासन के अधिकारी कुंडली मार कर बैठ गए हैं। तीन वर्ष से लगातार लिखापढ़ी के बावजूद प्रदेश सरकार ने न तो अपने स्तर से इसके लिए कोई कानून बनाया और न ही केंद्र के स्तर से बनाए गए नियामकीय दिशानिर्देशों पर ही अमल किया। हालात ये हैं कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक प्राइवेट प्ले स्कूलों की बाढ़ आई हुई है। लेकिन, उनकी जवाबदेही को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। कहा जा रहा है कि प्राइवेट प्ले स्कूलों के संचालन से जुड़े प्रभावशाली लोगों के प्रभाव में अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
आयोग ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
आयोग की वरिष्ठ सदस्य डा. शुचिता चतुर्वेदी ने गत एक मई को नया पत्र लिखा। उनके मुताबिक पिछले पत्र में रेगुलेटरी गाइडलाइन का अनुपालन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया था। मगर, एक वर्ष बीतने के बाद भी आयोग को रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने प्रदेश के समस्त जिलों में स्थित समस्त प्ले स्कूलों से संबंधित सूचना रेगुलेटरी गाइडलाइन में दिए गए प्रारूप पर इकट्ठा कराने तथा समस्त प्ले स्कूलों का नियमानुसार रजिस्ट्रेशन कराते हुए 15 दिन में रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह 15 दिन भी मंगलवार को समाप्त हो रहा है। फिलहाल बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से आयोग को कोई जवाब नहीं मिला है।
प्ले स्कूलों की मनमानी
शिक्षा विभाग प्रावइेट प्ले स्कूलों को रेगुलेट करने संबंधी कार्य नहीं कर रहा है। इस संबंध में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ही बता पाएगा।
-विजय किरन आनंद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में प्राइवेट प्ले स्कूलों को रेगुलेट करने के लिए कोई पॉलिसी नहीं है। विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कर रहा है। इस बारे में शिक्षा विभाग से बात करनी चाहिए।
- अनामिका सिंह, सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार
केंद्र के निर्देश का कराएंगे पालन
हम आंगनबाड़ी के प्री-स्कूल का विधिवत संचालन और मानीटरिंग करा रहे हैं। प्राइवेट प्ले स्कूल से संबंधित विषय शिक्षा विभाग को देखना चाहिए। यदि केंद्र सरकार ने बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को इसके लिए नोडल बनाया है तो इससे संबंधित दिशानिर्देश पता कर क्रियान्वयन सुनिश्चित कराऊंगी।
- बेबीरानी मौर्य, महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार मंत्री