कभी माफिया के लिए सियासत की नर्सरी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा चुनाव में ऐसे तत्वों से दूरी बनाने की कोशिश तो की, लेकिन मजबूरी भारी पड़ी। न-न करते ही सही, बसपा ने भी दागी चेहरों को टिकट देने में कोई गुरेज नहीं किया। जिन माफिया और आपराधिक छवि वाले को एंट्री नहीं दे सकी, उनके परिवार के लिए पार्टी के दरवाजे खोल दिए।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सितंबर 2021 में घोषणा की थी कि उनकी पार्टी किसी भी माफिया को टिकट नहीं देगी। इसके बाद भी बसपा ने बिजनौर में विजेंद्र सिंह को टिकट दिया। बिजेंद्र पर 9 मुकदमे दर्ज हैं। उनका नाम बाइक बोट घोटाले में भी आ चुका है। फिरोजाबाद के प्रत्याशी चौधरी बशीर छह शादियां करने की वजह से विवादित रह चुके हैं। अपनी चौथी पत्नी को तीन तलाक देने के बाद वह जेल भी गए थे।
सीतापुर में बसपा ने पूर्व भाजपा विधायक महेंद्र सिंह यादव को टिकट दिया है। आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट कट गया था। अब बसपा में शामिल होकर लोकसभा चुुनाव लड़ रहे हैं। सहारनपुर के प्रत्याशी माजिद अली पर भी छह मुकदमे दर्ज हैं।
बैक डोर से एंट्री
प्रदेश में बाहुबलियों में शुमार पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला बसपा के टिकट पर जौनपुर से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, शीलू हत्याकांड के आरोपी रहे बसपा के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम द्विवेदी के बेटे मयंक को बांदा से टिकट दिया गया है।
बागियों को भी मिली तवज्जो
बसपा ने मैनपुर से शिव प्रसाद यादव को टिकट दिया है, जो भाजपा से आए हैं। इसी तरह बरेली में कांग्रेस छोड़कर आए छोटेलाल गंगवार को टिकट मिला, लेकिन नामांकन रद्द हाेने से वह मैदान से बाहर हो चुके हैं। फर्रुखाबाद में कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले क्रांति पांडेय को प्रत्याशी बनाया गया है। बस्ती में भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे दयाशंकर मिश्रा को प्रत्याशी बनाया गया है। फैजाबाद के प्रत्याशी सच्चिदानंद पांडेय भाजपा छाेड़कर बसपा में आए हैं।
बसपा से जुड़े रहे ये माफिया और अपराधी
डीपी यादव, मुख्तार अंसारी, धनंजय सिंह, चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह, रिजवान जहीर, अनुपम दुबे, विकास दुबे, विनोद उपाध्याय, सुधीर सिंह, हाजी याकूब कुरैशी, हाजी इकबाल, शाइस्ता (माफिया अतीक अहमद की पत्नी), संजीव द्विवेदी उर्फ रामू द्विवेदी।