डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय और डा. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के विलय का मसला गंभीर होता जा रहा है। लोहिया अस्पताल केकर्मचारियों ने विलय प्रस्ताव बदलने का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू कर दिया है। 30 सितंबर से पांच अक्तूबर तक सुबह आठ से 10 बजे कार्य बहिष्कार करेंगे। सात सितंबर को पूरा अस्पताल ठप कर देंगे। इस दौरान किसी तरह की जनहानि हुई तो इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
लोहिया अस्पातल में शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा के पदाधिकारियों ने सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा मनमानी तरीकेसे अपना आदेश कर्मचारियों पर थोप रहे हैं।
मोर्चा के अध्यक्ष डीडी त्रिपाठी और उपाध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि लोहिया संस्थान के निदेशक ने 126 पदों को प्रतिनियुक्ति पर लेने का प्रस्ताव दिया है। इसे कर्मचारियों ने नामंजूर कर दिया है।
31 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की बैठक में साफ निर्देश दिए गए थे कि नियम- कानून को शिथिल कर सभी कर्मचारियों को समायोजित किया जाएगा। इसके बाद भी मनमानी की जा रही है। इस दौरान मंत्री प्रदीप नायक ने कहा कि अस्पताल में कार्यरत 350 से अधिक संविदा कर्मचारियों के संबंध में भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।