सौर ऊर्जा से चलने वाले चरखे के साथ सुनीता।
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चरखा सिर्फ स्वेदशी की पहचान ही नहीं है। इसके सहारे जीवन और गृहस्थी की गाड़ी भी चल सकती है। हाथ से चलने वाले चरखे अब पुरानी बात हो चुके हैं। वहीं सौर ऊर्जा से चलने वाले चरखे की सहायता से कम समय में ही ज्यादा आमदनी होती है। यह कहना है कि राजधानी के अमेठी निवासी सुनीता का।
इंवेस्टर्स समिट की प्रदर्शनी में अपना स्टॉल लगाने वाली सुनीता ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की सहायता से बिना किसी पूंजी के इसका काम शुरू हो जाता है। उनके बाद उनके पड़ोस के 27 परिवारों ने यह काम शुरू किया है।
सुनीता ने बताया कि उनके पति मैकेनिक का काम करते हैं। घर का काम करने के बाद वह भी गृहस्थी में सहयोग करना चाहती थीं, लेकिन ऐसा कोई काम नहीं था जो घर से किया जा सके। ऐसे में एक दिन उनके पास खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के लोग आए।