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Lucknow News: यहां किताबें बोलेंगी और गुनगुनाएंगी भी

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किताबें करती हैं बातेंबीते जमाने की
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दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की

क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें

किताबें कुछ कहना चाहती हैं,
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।

सचिन त्रिपाठी

लखनऊ। सफदर हाशमी की यह कविता कई दशक पुरानी है लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय की टैगोर लाइब्रेरी में अब इस कविता का हर शब्द सच्चाई के धरातल पर उतरने वाला है। इस लाइब्रेरी में किताबें अब वाकई में बोलेंगी और गुनगुनाएंगी भी। दरअसल, लखनऊ विश्वविद्यालय यहां एक अनूठी ऑडियो लाइब्रेरी तैयार करने जा रहा है जहां हेडफोन लगाकर विद्यार्थी गीत, गजल और कविता के साथ ही विभिन्न पाठ्य पुस्तकें भी सुन सकेंगे।
लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि एक जनप्रतिनिधि ने विख्यात शायर दुष्यंत कुमार के नाम पर 25 लाख रुपये देने की पेशकश की है। इसके आधार पर विवि ने उनको प्रस्ताव दिया है। साइबर लाइब्रेरी के बगल वाले कमरे में यह ऑडियो लाइब्रेरी विकसित की जाएगी। यहां स्क्रीन पर किताबों की सूची उपलब्ध होगी। इस पर क्लिक करते ही हेडफोन से सुना जा सकेगा। विद्यार्थियों को किताबें तलाशने, शेल्फ से निकालने और पढ़ने की जहमत भी नहीं उठानी होगी। विद्यार्थियों को अपनी पसंद की पुस्तक पर सिर्फ क्लिक करना होगा और उसके बाद वह किताब की पूरी सामग्री को सुन सकेंगे।
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तकनीक और विद्यार्थियों की पसंद के साथ आगे बढ़ रहा विवि

लविवि ने साइबर लाइब्रेरी के बाद युवाओं की पसंद और तकनीक के साथ कदमताल करने की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया है। अब युवा किताबें पढ़ने से ज्यादा उन्हें सुनने में दिलचस्पी रखते हैं। इंटरनेट पर इस तरह के तमाम एप और प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी ऑडियो लाइब्रेरी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए लविवि ने इस अनूठी लाइब्रेरी की योजना तैयार की है।
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दुष्यंत कुमार की लयबद्ध गजलों से होगी शुरुआत

लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय के अनुसार, यह अनुदान मूल रूप से दुष्यंत कुमार के नाम पर ही मिल रहा है। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी गजलों को लयबद्ध रूप में ऑडियो के माध्यम से पेश किया जाएगा।इसके लिए भातखंडे सम विश्वविद्यालय की मदद ली जाएगी। अगले चरण में अन्य कवि और लेखकों की रचनाओं के साथ ही पाठ्य पुस्तकों को भी इस प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
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