खेत जाते समय विद्युत तार की चपेट में आने से एक व्यक्ति इस कदर झुलस गया कि चिकित्सकों को उसके दोनों पैर काटने पड़े। 15 साल से वह इसी हालत में है और विद्युत विभाग ने उसकी सुनवाई तक नहीं की। राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने आदेश दिया है कि पीड़ित को 50 लाख रुपये मुआवजा तथा 10 लाख रुपये मानसिक एवं आर्थिक कष्ट के लिए अदा किए जाएं। 4000 रुपये वाद व्यय भी दिया जाएं। दो माह में सारा भुगतान न करने पर ब्याज भी देना होगा।
08 मार्च 2006 की शाम को लखनऊ के गांव मडियांव का रहने वाला मुन्ना सरकारी नलकूप से सिंचाई करने के लिए अपने खेत की तरफ जा रहा था। रास्ते में वह एक टूटे हुए हाईटेंशन विद्युत तार की चपेट में आ गया। तार लटका था और उसमें करंट प्रवाहित था। मुन्ना इस तार से चिपक गया। किसी तरह से सप्लाई कट कराने के बाद ग्रामीणों ने उसे तार से हटाया। तब तक मुन्ना बुरी तरह से झुलस चुका था। उसे छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विवि लखनऊ में ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां उसकी हालत बिगड़ती गई। उधर होली के कारण ज्यादातर कर्मचारी छुट्टी चले गए
उसके परिजन उसे वहां से डिस्चार्ज कराकर उजाला नर्सिंग सेंटर ले गए। यहां पैरों में जहर फैलने के कारण उसके दोनों पैर, बाएं हाथ का एक अंगूठा तथा अंगुली काटनी पड़ी। उसका दायां हाथ भी जल गया जो काम नहीं कर रहा है। परिवादी के मुताबिक उसने पुलिस, विद्युत अधिकारियों को कई बार गुहार लगाई पर न तो उसका मामला दर्ज किया गया और न ही उसके कोई प्रतिकर दिलाया गया। यहां तक कि विभाग के जेई ने मौके पर जाकर उसे देखा और अपनी आख्या में लिखा कि वास्तव में परिवादी के पैर कटे हैं और उसका हाथ भी सही काम नहीं कर रहा है। कहीं भी सुनवाई न होने के बाद पीड़ित ने राज्य उपभोक्ता फोरम का सहारा लिया।