रायबरेली। सलोन क्षेत्र में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले की विवेचना जल्द उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता ( एटीएस) को ट्रांसफर हो सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में जिम्मेदार कोई चूक नहीं चाहते। मामले की तह तक जाने के लिए एटीएस के साथ ही साइबर विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। सूत्रों के अनुसार फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के तार यूपी के अन्य जिलों से भी जुड़े हैं।
बाल संरक्षण गृह भेजा गया सीएससी संचालक का भांजा
फर्जीवाड़ा मामले में जन सेवा केंद्र (सीएससी) संचालक जीशान का भांजा भी शामिल था। उसकी उम्र करीब 16 साल है। नाबालिग होने के चलते उसे बाल संरक्षण गृह लखनऊ भेजा गया है। वह मूलरूप से कानपुर नगर के बाबा का पुरवा का रहने वाला है, लेकिन बचपन में से ही अपने मामा जीशान के घर रहता था। सीएससी संचालन में वह भी हाथ बंटाता था। ऐसे में पुलिस ने उसे भी आरोपी बनाया है।
26 जुलाई को सीएम से मिलेंगे विधायक
सलोन में 20 हजार जन्म प्रमाणपत्र के फर्जीवाड़े का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। सलोन से भाजपा विधायक अशोक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 26 जुलाई को मिलने का समय दिया है। वह मुख्यमंत्री से मिलकर मांग करेंगे कि फर्जीवाड़ा की जांच एटीएस को सौंपी जाय, ताकि इसमें शामिल लोग बेनकाब हो सकें।
मामले के विवेचक हुए बीमार
मामले की जांच सलोन कोतवाली में तैनात निरीक्षक आदर्श कुमार सिंह को सौंपी गई है। वह सोमवार को अचानक बीमार पड़ गए। अफसरों का दावा है कि उनकी अनुपस्थिति से जांच प्रभावित नहीं हो रही है। जल्द ही विवेचक भी काम शुरू कर देंगे।
पुलिस से अधिक एटीएस के पास विशेषज्ञ टीम होती है, जिसे साइबर व सर्विलांस में महारथ हासिल होती है। हालांकि अभी तक एटीएस को विवेचना ट्रांसफर करने जैसी कोई बात नहीं है। एटीएस के अधिकारी प्रकरण से जुड़ी जो जानकारी मांगते हैं, उन्हें उपलब्ध कराया जाता है। फिलहाल पुलिस तेजी से जांच आगे बढ़ा रही है।
नवीन कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक