लखनऊ। उरई के डॉक्टर सुनील कुमार अग्रवाल का रविवार सुबह कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भैसाकुंड श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। दिवंगत कोरोना योद्धा डॉ. सुनील को डॉक्टरों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस दौरान केजीएमयू समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे। अंतिम संस्कार में उनके परिवार से बेटा अनुराग अग्रवाल (जो 2016 बैच का जॉर्जियन है), डॉ. सुनील के छोटे भाई और भतीजे शामिल हुए। उरई निवासी डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल (58) वहीं के सरकारी अस्पताल में बतौर एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तैनात थे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनकी ड्यूटी कोविड-19 में लगाई गई थी। उन्हें ट्रॉमा के इंचार्ज के रूप में तैनाती दी गई थी। 25 अप्रैल को डॉ. सुनील की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी की दो डोज भी दी। वेंटिलेटर पर भर्ती डॉ. सुनील की तबीयत में सुधार हो रहा था। शनिवार को उनकी कोरोना की दोनों बार की रिपोर्ट निगेटिव भी आ गई थी। मगर डायबिटीज पीड़ित डॉक्टर को पेशाब संबंधी संक्रमण हो गया था। गुर्दों ने काम करना बंद कर दिया था। डायलिसिस के बावजूद गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। शनिवार शाम चार बजे उनकी मौत हो गई थी। रविवार सुबह करीब 10:30 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ये भी हुए शामिल
आईएमए के डॉ. पीके गुप्ता, सीएमओ कार्यालय की तरफ से उनके बैचमेट एवं मित्र डॉ. केके सक्सेना, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसके रावत, नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन के डॉ. भूपेंद्र सिंह व डॉ. प्रभात, केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु मौजूद रहे।
जिस संस्थान में पढ़े वहीं से अंतिम विदाई
डॉ. पीके गुप्ता ने बताया जिस संस्थान में डॉ. सुनील ने पढ़ाई की और लंबा वक्त साथ गुजारा। उसी संस्थान में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने बताया कि आईएमए की उरई शाखा ने सरकार से कोरोना योद्धा डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल को शहीद का दर्जा देने की मांग की है