तपोस्थली स्थित जेतवन परिसर पर प्रार्थना करते कोरिया से आए अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही। कोरिया से आए 42 सदस्यीय दल ने रविवार को जेतवन परिसर का भ्रमण कर गंध कुटी में भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में प्रार्थना की। इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध ने दुख व उसके कारक व उसके निदान पर आत्म-मीमांसा की थी। दुख है तो उसका कारण भी है। यदि कारण का निदान हो जाए तो दुख से मुक्ति मिलेगी। दुख का कारण अंधकार है। अंधकार का तात्पर्य मन के अंधकार से है। इस अंधकार का कारण अज्ञान है। व्यक्ति अज्ञानता वश यह मेरा है, यह तेरा है, मैं हूं और सिर्फ मैं हूं के चक्कर में पड़ा रहता है। इस दौरान काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।