फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तान बनवाकर बाद में पछताए खलीकुज्जमा

विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ ने जहां स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। वहीं, यहीं देश विभाजन की नींव भी पड़ी। सूत्रधार बने नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष चौधरी खलीकुज्जमां। उन्होंने कांग्रेस की बैठक में मांग की कि मुसलमान हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते। लोगों को ताज्जुब हुआ कि जो खलीकुज्जमां कुछ दिन पहले तक कांग्रेस के नेतृत्व में देश की आजादी की लड़ाई में शामिल थे, उन्होंने अचानक हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा क्यों उठा दिया। पर, खलीकुज्जमां अपनी मांग पर अड़े हुए थे। कांग्रेस की बैठक में इतने तर्क दे दिए कि मुंबई में रह रहे मोहम्मद अली जिन्ना भी खलीकुज्जमां के समर्थन में उतर पड़े। मुस्लिम लीग भी यही मांग कर रही थी। इन सभी को खलीकुज्जमां के रूप में लखनऊ में एक बड़ा पैरोकार जो मिल गया था। यहीं से देश के विभाजन की नींव पड़ी। पूर्व महापौर डॉ. दाऊ जी गुप्त बताते हैं कि ‘चौधरी खलीकुज्जमां की इस मांग के पीछे कोई सैद्धांतिक कारण नहीं था। बात बस इतनी भर थी कि पं. जवाहर लाल नेहरू के मौलाना अबुल कलाम आजाद को विशेष महत्व देते थे। खलीकुज्जमां इससे नाराज रहते थे।उनकी तमाम धमिकयों के बावजूद जब नेहरू न मानें तो उन्होंने खलीकुज्जमां ने देश विभाजन की मांग उठाकर नेहरू पर दबाव बनाने की कोशिश की। पर, नेहरू नहीं झुके और इधर चौधरी मुस्लिम लीग में शामिल हो गए। चौधरी ने ही देश के बंटवारे का ड्राफ्ट तैयार किया। शुरू में तो वह पाकिस्तान नहीं गए लेकिन बाद में एक दिन वह पाकिस्तान चले गए। पर, वहां भी उनकी बहुत दिन नहीं निभ पाई। वह गवर्नर जनरल बनना चाहते थे। पर, नहीं बनाए गए। कछ ओहदे उन्हें जरूर दिए गए जिनसे वह संतुष्ट नहीं हुए। कुछ दिनों तो उन्होंने सामंजस्य बैठाया लेकिन बाद में उन्होंने पाकिस्तान भी छोड़ दिया और लंदन चले गए। लंदन में उनसे मुलाकात भी हुई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने किए पर कई बार पछतावा व्यक्त किया था। कहा था कि पाकिस्तान बनना गलत था। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।’
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें