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Lucknow News: केजीएमयू में शुरू होगा फेफड़े का प्रत्यारोपण

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में किडनी और लिवर के बाद अब फेफड़े का भी प्रत्यारोपण शुरू होगा। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार करके केजीएमयू प्रशासन को दे दिया है। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बुधवार को यह जानकारी दी। वे पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग की ओर से सेप्सिस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।

प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि इस समय केजीएमयू ही एकमात्र संस्थान है जहां पर किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण हो रहा है। अब इसी कड़ी में लंग ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही है। शताब्दी फेज-1 में बनी ट्रांसप्लांट यूनिट में ही इसे भी शामिल किया जाएगा। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग के अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश की ओर से मिले प्रस्ताव को शासन भेजा जाएगा। अभी तक प्रदेश के किसी भी सरकारी संस्थान में लंग ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं है। इसके शुरू होने के बाद केजीएमयू का दर्जा और ऊपर उठ जाएगा।
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डॉ. शारदा को एयरलिफ्ट कर ले जाना पड़ा था हैदराबाद



लंग ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की वजह से कोरोना काल में लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉ. शारदा को एयरलिफ्ट करके हैदराबाद ले जाया गया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उनका प्रत्यारोपण नहीं हो पाया था। प्रो. सोनिया नित्यानंद के निदेशक कार्यकाल के दौरान की ही यह घटना थी। इसके बाद ही उन्होंने लंग प्रत्यारोपण की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी थी। अब केजीएमयू में इस प्रस्ताव के बाद प्रत्यारोपण को नई गति मिलने जा रही है।

केजीएमयू बना चुका है लिवर ट्रांसप्लांट का रिकॉर्ड



केजीएमयू लिवर ट्रांसप्लांट को लेकर रिकॉर्ड बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25वां सफल लिवर प्रत्यारोपण होने पर अपना बधाई संदेश भेजा था। विश्वविद्यालय में इसी साल किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हुआ है। पहले चार महीने में ही यहां पर सात किडनी ट्रांसप्लांट की गईं।



25 लाख रुपये तक आती है प्रत्यारोपण की लागत



प्रदेश में फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कुछ एम्स, दिल्ली के निजी संस्थानों के साथ ही दक्षिण भारत के अस्पतालों में इसकी सुविधा उपलब्ध है। एक अनुमान के अनुसार इसकी लागत 12 से 25 लाख रुपये के करीब आती है। निजी संस्थानों के मुकाबले केजीएमयू में लिवर और किडनी प्रत्यारोपण आधे से भी कम खर्च में हो जाता है। ऐसे में केजीएमयू में इससे कम खर्च आने का अनुमान है। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई प्रस्ताव नहीं बना है।



ब्रेन डेड व्यक्तियों के अंग आ सकते हैं काम

डॉ. वेद प्रकाश के मुताबिक ब्रेन डेड हुए व्यक्ति के अंग प्रत्यारोपण के काम आ सकते हैं। इसमें लिवर, किडनी, कॉर्निया के साथ ही फेफड़ा भी जरूरतमंदों को मिल सकते हैं। इस समय प्रदेश में करीब 25 हजार लोगों को विभिन्न अंगों के प्रत्यारोपण की जरूरत है। पर, बमुश्किल 1500 प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं।
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-अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार 1995 के बाद से केवल 2,546 लोगों ने ही मृत्यु के बाद अपने अंगों को दान करने का विकल्प चुना। वहीं, 34,094 लोगों ने जिंदा रहते अंगदान करने का विकल्प चुना।
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