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KGMU : मानसिक रोग विभाग में शोध, कोविड संक्रमण के बाद एकल परिवार वालों ने ज्यादा मानसिक समस्याएं झेलीं

Wed, 18 Jan 2023 09:24 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

मुख्य शोधकर्ता डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि पोस्ट कोविड समस्याओं को लेकर मरीज अस्पताल में आते रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर शोध की योजना तैयार की गई। यह अध्ययन एक जून से दिसंबर 2020 की अवधि में आइसोलेशन वार्ड में रहे 243 मरीजों पर किया गया।
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केजीएमयू - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोविड 19 संक्रमण के बाद मरीजों में मानसिक समस्याएं काफी आम देखी गईं। केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग ने इसे लेकर शोधपत्र प्रकाशित किया है। 224 लोगों पर किए गए शोध में पाया गया है कि एकल परिवार में रहने वालों को संक्रमण के बाद मानसिक समस्याएं ज्यादा हुईं। महिलाओं, शहरी आबादी, शादीशुदा और ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों में अन्य के मुकाबले ये समस्याएं अधिक देखने को मिलीं। इस शोध को क्लीनिकल एपिडमोलॉजी एंड ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित किया गया है।

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मुख्य शोधकर्ता डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि पोस्ट कोविड समस्याओं को लेकर मरीज अस्पताल में आते रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर शोध की योजना तैयार की गई। यह अध्ययन एक जून से दिसंबर 2020 की अवधि में आइसोलेशन वार्ड में रहे 243 मरीजों पर किया गया। हालांकि, इनमें से 224 से ही रिपोर्ट मिल सकी। शोध में पाया गया कि संक्रमण के बाद लोगों को तनाव, अवसाद, शरीर में दर्द व चुभन, भूलने की बीमारी, सोचने की क्षमता प्रभावित होना, बिना योजना के काम शुरू करना, नशे की आदत बढ़ना, ज्यादा गुस्सा आना जैसी समस्याएं देखी गईं। ये लक्षण भी सभी में समान नहीं था। मरीजों में सबसे ज्यादा समस्या डिप्रेशन की ही देखने को मिली। इसके साथ ही एंजायटी, सनक और अनिद्रा वाले मरीज भी काफी ज्यादा थे। लिंग, वैवाहिक स्थिति, निवास, परिवार और शिक्षा जैसे कारकों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई।

पांच भाग में पूछे गए सवाल
इस शोध में प्रश्नोत्तरी का उपयोग किया गया। इसे पांच भागों में बांटा गया। पहले भाग में अध्ययन का उद्देश्य और मरीज की सहमति को शामिल किया गया। दूसरे में उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थित, परिवार की प्रकृति, शिक्षा और व्यवसाय जैसी सामाजिक विशेषताओं को शामिल किया गया। तीसरे में तनाव के स्तर को मापने के लिए 10 सवाल रखे गए। चौथे में तनाव के स्तर मापने के लिए 14 अन्य सवाल शामिल किए गए। पांचवें भाग में मानसिक विकारों की स्थिति और सांख्यिकी आकलन के लिए 10 सवाल रखे गए। हर भाग में चार वैज्ञानिक मॉडल के आधार पर संक्रमितों को नंबर दिए गए। इन चारों मॉडल में एकल परिवार, महिलाओं, शहरी आबादी, शादीशुदा और ज्यादा पढ़े-लिखे का स्कोर ज्यादा निकला। इसके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई।
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शोध में ये रहे शामिल
डॉ. पवन कुमार गुप्ता, डॉ. श्वेता सिंह, डॉ. पूजा महौर, डॉ. बंदना गुप्ता, डॉ. मनु अग्रवाल, डॉ. पीके दलाल, डॉ. विवेक अग्रवाल, डॉ. अनिल निश्चल, डॉ. आदर्श त्रिपाठी, डॉ. डी हिमांशु, डॉ. अमित आर्या, डॉ. सुधीर वर्मा, डॉ. दीपांशु मिश्रा और डॉ. विशाल गुप्ता।

224 में से 132 संक्रमित थे एकल परिवार वाले
इस अध्ययन में 224 लोगों को शामिल किया गया था। इन सभी को मानसिक समस्याएं थीं। इनमें से 132 लोग एकल परिवार वाले थे इनकी मानसिक समस्याओं का स्तर ग्रामीण क्षेत्र के संक्रमितों के मुकाबले ज्यादा था। यही स्थिति 148 लोग शादीशुदा लोगों की भी थी। 196 शहरी क्षेत्र के निवासी थे। शहरी क्षेत्र के मुकाबले ग्रामीणों की संख्या सिर्फ 28 ही थी। ग्रामीणों के मुकाबले शहरवासियों की संख्या तो ज्यादा थी ही, साथ ही उनकी मानसिक समस्याएं भी ज्यादा थीं। इसी तरह कुल संक्रमितों में 117 लोग स्नातक तक की पढ़ाई वाले थे, इनकी समस्याएं इससे कम शिक्षा वालों के मुकाबले ज्यादा मिलीं। शोध में भले ही पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 68 ही थी, पर उनकी मानसिक समस्याएं हर तरह से ज्यादा गंभीर थीं।
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एकल परिवार 132
शादीशुदा      148
शहरी          196
पढ़े-लिखे      117
महिलाएं       68 (शोध में 68 महिलाएं ही शामिल थीं)

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