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पूरी तरह से कट चुकी श्वांस नली से चलती रही युवक की सांस, केजीएमयू के डॉक्टरों ने पांच घंटे सर्जरी कर बचाई जान

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केजीएमयू के चिकित्सकों ने सर्जरी कर युवक को दिया नया जीवन।
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लखनऊ। केजीएमयू के डॉक्टरों ने महज एक नस के सहारे लटकी गर्दन को जोड़कर सीतापुर निवासी युवक को नया जीवन दिया। करीब पांच घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद उसकी जान खतरे से बाहर है।
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सीतापुर के लहरपुर का युवक 27 जुलाई को हादसे का शिकार हुआ था। अचानक आए जानवर से बचने की कोशिश में उसकी बाइक सड़क से नीचे चली गई और वह लड़खड़ाकर गिर पड़ा। इस दौरान खेत के किनारे लगे लोहे के कंटीले तार से रगड़ने से उसकी गर्दन कट गई। सिर्फ एक नस के सहारे उसका सिर बाकी धड़ से जुड़ा रह गया। सांस और खाने की नली भी कट गई थीं। ऐसी हालत में घरवाले उसे लेकर सीधे केजीएमयू पहुंचे। यहां थोरेसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र यादव की निगरानी में मरीज को भर्ती किया गया। युवक को बचाने के लिए उन्होंने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला किया। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि सबसे पहले खून और फिर खाने व सांस की नली को जोड़ा गया। रात आठ बजे के करीब शुरू हुआ ऑपरेशन एक बजे के करीब पूरा हुआ। एक सप्ताह बाद मरीज की हालत में काफी सुधार है। अब वह धीरे-धीरे बोल पा रहा है।
डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि युवक की सांस की नली पूरी तरह से कट चुकी थी, जो गले के पास लटक रही थी। अच्छी बात यह रही कि उसकी सांस की नली में कुछ फंसा नहीं था। वह उसी लटकती नली के सहारे सांस लेता रहा। अस्पताल पहुंचने पर ऑक्सीजन देने के लिए इसी नली में ट्यूब डाला गया। डॉ. शैलेंद्र के अनुसार युवक की सांस, खाने की और खून की छोटी नसें कट चुकी थीं, लेकिन इसकी मुख्य नस जुड़ी रह गई। यही वजह रही कि सीतापुर से आने में समय लगने के बावजूद इतना खून नहीं बहा कि उसकी जान चली जाए। ऑपरेशन के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। हालत में सुधार होने पर युवक को वेंटिलेटर से हटाया गया।
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युवक की सांस की नली गले के ऊपर और जीभ के अंदर कुल दो जगह से कट गई थी। इस वजह से सांस की नली को मुंह के भीतर ही जोड़ा गया। खाने की नली सांस की नली से पीछे होती है, इसलिए सबसे पहले उसे ही जोड़ा गया। वहीं, युवक की सांस की नली ही कट चुकी थी, इसलिए एनीस्थीसिया टीम के लिए भी चुनौतियां कम नहीं थीं। पूरे ऑपरेशन के दौरान युवक की हालत स्थिर बनाने में डॉक्टरों की कुशलता और विशेषज्ञता दोनों ही जरूरी थी, जिसे एनीस्थीसिया के डॉक्टरों ने संभव बनाया।
ऑपरेशन में शामिल डॉक्टरों की टीम
डॉ. शैलेंद्र यादव, ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. यादवेंद्र, प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, एनीस्थीसिया विभाग के डॉ. तन्मय तिवारी और आईसीयू के प्रमुख डॉ. जिया।
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