लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का 18वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इसमें जब मेधावियों को पदक और डिग्री मिली तो उनके चेहरे की चमक देखने लायक थी। पदक विजेताओं की सूची में इस बार भी छात्राओं ने छात्रों से बाजी मार ली। समारोह में कुल 85 मेडल दिए गए। इन्हें पाने वालों में 56 फीसदी छात्राएं व 44 फीसदी छात्र रहे।
पंडित अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह मौजूद थे। समारोह में डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पद्मश्री, पद्मभूषण और बीसीराय अवार्डी ब्रिगेडियर डॉ. अनिल कोहली को डीएससी की मानद उपाधि प्रदान की गई। अमेरिका में बसे भारतीय मूल के फिजीशियन डॉ. मोनी जैदी को भी डीएससी की उपाधि से नवाजा गया। इस मौके पर केजएमयू में एमबीबीएस की टॉपर डॉ. महविश अहमद को हीवेट गोल्ड मेडल, चांसलर्स मेडल और यूनिवर्सिटी ऑनर्स मेडल समेत कुल 13 गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल व दो बुक प्राइज प्रदान किए गए। डॉ. गुंजन मेहता को 10 पदक, डॉ. दीपक बंसल व डॉ. नेहा रानी को सात-सात पदक दिए गए। इस मौके पर केजीएमयू के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. एसके दास को डॉ. केबी भाटिया गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की। समारोह के दौरान अंगदान करने वाले परिवारों को दधीचि सम्मान दिया गया।
खुद को अपग्रेड कर रहा है केजीएमयू : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में मेधावियों को बधाई दी। साथ ही समय के हिसाब से खुद को अपग्रेड करने पर केजीएमयू की तारीफ की। उन्होंने कहा कि केजीएमयू आधुनिक तरीके से इलाज करने के साथ ही अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा दे रहा है। नैक मूल्यांकन के लिए भी शानदार काम कर रहा है। उन्होंने केजीएमयू प्रशासन से अगले 10 साल का विजन डॉक्यूमेंट बनाने के लिए कहा। इसमें 10 साल बाद केजीएमयू किस स्थिति में होगा, उसकी तैयारी की जा सकेगी।
विश्व भर में होती है केजीएमयू की चर्चा : ब्रजेश पाठक
समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि केजीएमयू सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में छाया हुआ है। हाल के दिनों में उन्होंने कई देशों की यात्रा की। सभी जगह उनको केजीएमयू की चर्चा सुनने को मिली। विश्व के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों में चुने गए केजीएमयू के डॉक्टरों को उन्होंने विशेष रूप से बधाई देते हुए विवि को सरकार की ओर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
यह सम्मान सबसे खास : डॉ. अनिल
समारोह में मानद उपाधि से सम्मानित किए गए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पद्मश्री, पद्मभूषण और बीसीराय अवार्डी ब्रिगेडियर डॉ. अनिल कोहली ने बताया कि हापुड़ में हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने के बाद जब केजीएमयू में दाखिला लिया तो डिग्री हासिल करना बड़ी बात थी। इसके बाद कई डिग्री और सम्मान मिले, लेकिन आज अपने ही संस्थान में यह सम्मान मिलना सबसे खास है।
जीवन में मेंटर की भूमिका अहम : डॉ. मोनी
डीएससी की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए अमेरिका में बसे भारतीय मूल के फिजीशियन डॉ. मोनी जैदी ने छात्रों से जीवन में एक अच्छा मार्गदर्शक चुनने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि क्वीन मेरी अस्पताल में 1960 में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता ने 1950 में यहां से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी, इसलिए उनके लिए यह संस्थान और यह सम्मान दोनों ही बेहद खास हैं।
बातचीत-
अभी हुई है शुरुआत, जाना है और आगे
मेरे पापा और भाई डॉक्टर हैं। इसलिए मैंने पहले ही डॉक्टर बनने की राह चुनी। टॉप करके सबसे ज्यादा मेडल हासिल करना सुखद है। यह अभी शुरुआत है, मेरा मकसद आगे चलकर नॉन क्लीनिकल ब्रांच में पीजी करना है।
डॉ. महविश अहमद, चांसलर्स, हीवेट और यूनिवर्सिटी ऑनर्स गोल्ड मेडल
परिवार और शिक्षकों का रहा योगदान
मेरी सफलता में घर वालों खासकर दादाजी का अहम रोल है। शिक्षकों ने भी काफी मदद की। मेरा मकसद मेडिसिन से पीजी करके कॉर्डियोलॉजिस्ट बनना है। जूनियर्स को सलाह है कि वे थ्योरी व प्रैक्टिकल पर बराबर फोकस करें।
डॉ. दीपक बंसल
बनना है बाल रोग विशेषज्ञ
बचपन से सपना था कि डॉक्टर बनूं। एमबीबीएस के बाद मेरा सपना बाल रोग विशेषज्ञ है। मेरा मानना है कि पढ़ाई के लिए रूटीन बहुत जरूरी है। अंतिम समय में दिन रात पढ़ाई के बजाय बराबर पढ़ते रहना ज्यादा उपयोगी होता है।
डॉ. अदिति चंद्रा
परिवार की पहली डॉक्टर
मैं अपने परिवार से डॉक्टर बनने वाली पहली सदस्य हूं। बीडीएस के बाद मैंने एमडीएस की तैयारी शुरू कर दी है। दीक्षांत समारोह में डिग्री पाना ही मेरे लिए बड़ी बात है मेडल मिलने की बात तो मैंने कभी सोची ही नहीं थी।
डॉ. गुंजन मेहता
पूरा हुआ मम्मी पापा का सपना
मेरे पिता दर्जी और मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। एमबीबीएस की डिग्री और पदक हासिल करने में सबसे बड़ा योगदान उन्हीं का है। मैं जहां से आई हूं वहां पर भी इस डिग्री का उपयोग हो सके, इसलिए मैं बराबर प्रयास करूंगी।
डॉ. नेहा रानी
सर्जरी में करना है नाम रोशन
मेरा मकसद शुरू से ही सर्जरी के क्षेत्र में जाना था। डिग्री के साथ ही मेडल जीतना मेरे लिए बेहद अहम है। इसे मैं अपने घरवालों के साथ ही शिक्षकों को समर्पित करना चाहती हूं।
डॉ. अलमास फात्मा
इनको मिले मेडल
एमबीबीएस
डॉ. महविश अहमद, डॉ. दीपक बंसल, डॉ. अदिति चंद्रा।
डेंटल
डॉ. गुंजन मेहता, डॉ. नेहा रानी।
डीएम
डॉ. अरविंद जायसवाल, डॉ. विजयवर्मन वी, डॉ. पाटिल मनीष रमेश, डॉ. चंदवार कुणाल आशुतोष।
एमसीएच
डॉ. शाश्वत तिवारी, डॉ. मनीगंदन के, डॉ. शशिराज सिंह, डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा, डॉ. नाबा कुमार बर्बन।
एमडी
डॉ. कृष्णा यादव, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. कृति गुप्ता, डॉ. रूबल जलोटा, डॉ. मोहित मिश्रा, डॉ. अनिल वार्गीश, डॉ. आकृति भारद्वाज, डॉ. हिमांशु चौहान, डॉ. शुभम श्रीवास्तव, डॉ. गेर्लिन वार्गीश, डॉ. दिव्या शर्मा, डॉ. शुभम सिंह, डॉ. स्वाति अग्निहोत्री, डॉ. अंशिका मिश्रा, डॉ. अथीरा जे प्रकाश, डॉ. दिव्या कुकरेजा, डॉ. नंदिनी दीक्षित, डॉ. अंकिता मंडल, डॉ. रोहित द्विवेदी।
एमएस
डॉ. नंदिनी दीक्षित, डॉ. देविशा अग्रवाल, डॉ. मालविका सिंह, डॉ. आशुतोष महाराणा, डॉ. डॉ. प्रखर मिश्रा, डॉ. अलमस फातिमा।
पीजी डेंटल
डॉ. जया अग्रवाल।
एमडीएस
डॉ. अभिलाषा किसनलाल, डॉ. ज्योत्सना विमल।
फैकल्टी- डॉ. एसके दास।