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ह्रषिकेश सुलभ को कथाक्रम सम्मान

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लखनऊ। हिंदी कथा साहित्य पर केंद्रित कथाक्रम की शृंखला का 30वां वार्षिक समारोह रविवार को कैफी आजमी अकादमी सभागार में हुआ। इसमें वरिष्ठ कथाकार व नाटककार हृषिकेश सुलभ को आनंद सागर स्मृति कथाक्रम सम्मान 2022 से सम्मानित किया गया। वरिष्ठ कथाकार राजेंद्र राव व संजीव ने उन्हें 21 हजार रुपये, अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोग किताबों से दूर नहीं भाग रहे हैं। यदि भाग रहे होते तो इतनी संख्या में किताबें नहीं छप रही होतीं। ये भ्रम है, जिसमें लोग जी रहे हैं।
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कार्यक्रम का संचालन सरिता निर्झरा ने किया। इस दौरान संयोजक शैलेंद्र सागर समेत आयोजन समिति के सदस्य शिवमूर्ति, राकेश, रजनी गुप्त, डॉ. पवन अग्रवाल और वीरेंद्र सारंग भी मौजूद रहे। अन्य आमंत्रित लेखकों में शंभू गुप्त, कंवल भारती, संजीव कुमार, उर्मिला शिरीष, नीरज खरे, राकेश बिहारी, योगेंद्र आहुजा और प्रज्ञा रोहिणी थीं। कार्यक्रम में आजादी : हिंदी के 75 वर्ष पर भी विचार-विमर्श हुआ।
साहित्य बासी न हो, इसलिए उसे पकना पड़ता है
वरिष्ठ कथाकार ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि ऊपर से सब कुछ प्रसन्न दिखाई देता है लेकिन हम 1947 की पीड़ा भोग रहे हैं। आज भी लोग विस्थापन की पीड़ा भोगते हुए गांवों से शहर की ओर भाग रहे हैं। उन्होेंने कहा कि साहित्य बासी न हो, इसलिए उसे पकना पड़ता है जिससे वह सालों साल जीवित रहे। लेखन से लोगों के जीवन पर बहुत फर्क पड़ता है। साहित्य से संस्कार बनते हैं। हर तरह का पाठक मौजूद हैं। ई-बुक जैसे प्लेटफॉर्म से किताब खरीदने का माध्यम बदल गया है। रोज कुछ सृजन करने की भूख बनी रहनी चाहिए। भूख से पता चलता है कि व्यक्ति जिंदा है। आज के युवा रंगमंच से कितना जुड़े हैं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि यहां पर अमिताभ बच्चन और नसीरुद्दीन एक साथ आ जाएं तो जाहिर है कि भीड़ अमिताभ बच्चन के पास ही लगेगी। बेहतरीन सुविधाजनक चीजों से हर कोई जुड़ना चाहता है।
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