फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में करन जौहर को आरोपों से अवमुक्त करने की अर्जी पर बहस पूरी हो गई है।
सीजेएम प्रमोद कुमार ने सुनवाई के बाद 5 अगस्त के लिए निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
गोमतीनगर के विवेकखंड निवासी प्रताप चन्द्र ने वर्ष 2002 में कोर्ट में करन जौहर के खिलाफ परिवाद दायर किया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि फिल्म में राष्ट्रगान के दौरान जब परिवादी व उसके दोस्त सम्मान में खड़े हो गए तो हॉल में मौजूद लोगों ने उन्हें गालियां दीं और हंसी उड़ाई।
फिल्म में राष्ट्रगान का अपमान किया गया है। भले ही फिल्म की शूटिंग विदेश में हुई है, लेकिन सभी कलाकार, निर्माता-निर्देशक भारतीय हैं।
प्रताप ने सेंसर बोर्ड पर भी आरोप लगाया गया कि उसने राष्ट्रगान के अपमान को नजरअंदाज करके फिल्म को प्रदर्शित करने के लिए प्रमाण पत्र दिया।
मामले में तत्कालीन सीजेएम ने करन को प्रथमदृष्टया आरोपी मानते हुए 17 अप्रैल 2002 को उनके खिलाफ समन जारी करके कोर्ट में तलब किया था।
इस आदेश के खिलाफ करन की ओर से हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां से उनकी अर्जी खारिज हो गई।