लखनऊ। डॉक्टर और इंजीनियरिंग डिग्रीधारकों में विदेशी नौकरी के प्रति हमेशा से काफी क्रेज रहा है। दूसरी ओर एमए और बीए जैसी परंपरागत डिग्रीधारक देश में नौकरी और रोजगार के अवसर तलाशते रहे हैं। कोविड-19 महामारी के बाद इसमें बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। लविवि से परंपरागत पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने वाले काफी विद्यार्थी अब विदेश में नौकरी का रुख कर रहे हैं।
यही वजह है कि वर्ष 2019 के बाद से विवि से ट्रांसक्रिप्ट बनवाने वालों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता जा रहा है। कोविड से पहले के आंकड़ों से तुलना करें तो अब तक इसमें दस गुना से ज्यादा की बढोतरी आ चुकी है।
लखनऊ विवि में कोविड महामारी से पहले तक हर साल ट्रांसक्रिप्ट के आवेदन बमुश्किल 50 होते थे। वर्ष 2020 में लॉकडाउन खुला तो इसमें अचानक तेजी आ गई। साल 2020 में 602 ट्रांसक्रिप्ट जारी हुई थीं। साल 2021 में 656 तो वर्ष 2022 में 690 डिग्रीधारकों को ट्रांसक्रिप्ट जारी हुई। इस साल अभी परीक्षा होनी हैं। इसलिए बीते साल में डिग्री हासिल करने वाले इक्का-दुक्का डिग्रीधारक ही ट्रांसक्रिप्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं। अप्रैल के बाद इसमें तेजी देखने को मिलेगी। अभी तक ट्रांसक्रिप्ट जारी करने का ज्यादातर काम इंजीनियरिंग और चिकित्सीय के साथ ही अन्य प्रोफेशनल संस्थान में ही होता था। अब यह नया चलन देखने को मिल रहा है।
क्यों पड़ती है ट्रांसक्रिप्ट की जरूरत
हर देश में प्रचलित डिग्री और उनके नाम में काफी अंतर होता है। किसी व्यक्ति ने अपनी डिग्री में किन विषय और सामग्री का अध्ययन किया है, इसकी जानकारी के लिए ट्रांसक्रिप्ट की जरूरत होती है। ट्रांसक्रिप्ट में इसका पूरा ब्योरा अंग्रेजी भाषा में दर्ज होता है। लविवि में ट्रांसक्रिप्ट के साथ ही अंग्रेजी भाषा में डिग्री लेने के लिए भी अलग से आवेदन करना होता है। लविवि अपने अंकपत्र भले ही अंग्रेजी में देता हो पर, परंपरागत रूप से अपनी डिग्री हिंदी में ही जारी करता है।
कोट-
जल्द तैयार कराकर देते हैं ट्रांसक्रिप्ट
ट्रांसक्रिप्ट की जरूरत हर छात्र को नहीं पड़ती है। विदेश में नौकरी पाने वाले विद्यार्थी ही इसकी मांग करते हैं। उनकी जरूरत के अनुसार, जल्द से जल्द उनको ट्रांसक्रिप्ट जारी कर दी जाती है।
- विद्यानंद त्रिपाठी, परीक्षा नियंत्रक, लविवि
बढ़ रहे हैं मौके
अच्छी बात है कि लविवि के विद्यार्थियों के लिए देश के साथ ही विदेशों में भी नौकरी के अवसर बढ़ रहे हैं। ट्रांसक्रिप्ट बनवाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा होना, इसका प्रमाण है। लविवि अपनी एल्युमिनाई एसोसिएशन के सहयोग से विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने में और मदद मुहैया कराएगा।
- डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि