ग्राम्य विकास विभाग ने मनरेगा में फर्जी जॉब कार्ड के खेल को बंद करने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश के सभी विकासखंडों (ब्लॉकों) के 10-10 ग्राम पंचायतों में अब जॉब कार्ड की जांच की जाएगी। राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों के फीडबैक में कुछ जिलों में मनरेगा में फर्जी जॉब कार्ड की शिकायतें सामने आई हैं। ग्राम प्रधानों व ग्राम रोजगार सहायकों के खिलाफ शिकायत मिलती रहती है कि वह पात्र श्रमिकों की जगह फर्जी जॉब कार्डधारकों को काम आवंटित करते हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने साफ किया है कि पात्र श्रमिकों को काम से वंचित रखने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने अब हर ब्लॉक में 10-10 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के जॉब कार्ड की जांच कराने के निर्देश दिए है। इसके लिए हर ग्राम पंचायत पर शिविर लगाकर जॉब कार्ड की जांच की जाएगी। इसमें फर्जी जॉब कार्ड मिलने पर उस कार्ड निरस्त करने के साथ संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मनरेगा में पारदर्शिता के लिए श्रमिकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए है। इससे न केवल फर्जी उपस्थिति की शिकायतें दूरी होगी बल्कि काम के घंटे का सही आकलन भी हो सकेगा। वहीं रोजाना कितने श्रमिकों को काम मिला है, इसका सही आंकड़ा मिलेगा। बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए हर ग्राम पंचायत स्तर पर बायोमीट्रिक मशीनें उपलब्ध करानी होगी।
हजारों की संख्या में फर्जी श्रमिक होंगे बाहर
ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी ने बताया कि मनरेगा जॉब कार्ड की जांच और बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज किए जाने से हजारों की संख्या में फर्जी श्रमिक बाहर हो जाएंगे। इससे पात्र श्रमिकों को काम मिलने में आसानी होगी और अनियमितता की शिकायतें भी दूर होंगी।