म्यूकर माइकोसिस की वजह से गल चुके जबड़े के स्थान पर कृत्रिम जबड़ा लगाया जा सकेगा। नई तकनीक में ग्लॉबेलर इम्प्लांट नाक के रास्ते माथे की हड्डी में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा।
इससे जबड़े का आधार तैयार हो सकेगा। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय में डेंटल क्षेत्र की नई तकनीकों पर आयोजित सेमिनार में दिल्ली के डॉ. विवेक गौड़ ने ये जानकारी दी।
केजीएमयू के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग के डॉ. लक्ष्य कुमार ने बताया कि कई बार पीछे के दांत टूट जाते हैं। लोग इन दांतों को दोबारा लगवाने में लापरवाही बरतते हैं।
इसकी वजह से हड्डी भी अपनी जगह से हट जाती है। ऐसा होने पर दांत लगवाने के लिए नकली हड्डी प्रत्यारोपित करनी होती है।
इससे पहले कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से काफी कुछ सीखने को मिलता है।
इस मौके पर दंत संकाय के डॉ. आरके सिंह को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। बनारस के डॉ. अखिलेश व केजीएमयू के डॉ. लक्ष्य कुमार को फेलोशिप से सम्मानित किया गया।