हवाला कारोबारी नंद किशोर चतुर्वेदी की कंपनी हमसफर डीलर्स पर आयकर विभाग ने कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आयकर विभाग ने शुक्रवार को हमसफर डीलर्स की आधा दर्जन सहयोगी कंपनियों के छह शहरों के 25 ठिकानों पर छापा मारकर अहम सुबूत जुटाए हैं। मुंबई, दिल्ली, देहरादून, नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ में मारे गए छापों में हमसफर डीलर्स और उसकी सहयोगी कंपनियों के बेनामी होने के दस्तावेजी सुबूत मिले हैं।
बता दें कि हमसफर डीलर्स को राजधानी स्थित सुल्तानपुर रोड पर 200 एकड़ की टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस लखनऊ विकास प्राधिकरण ने दिया है। यह भूमि हमसफर डीलर्स और उसकी सहयोगी कंपनियों ने सहारा इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों से खरीदी थी। दरअसल, बीते वर्ष जून माह में आयकर विभाग, लखनऊ की जांच इकाई ने रीयल एस्टेट कंपनी पिनटेल ग्रुप के ठिकानों पर छापा मारा था। जांच में सामने आया था कि मथुरा निवासी हवाला कारोबारी नंद किशोर चतुर्वेदी महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक घराने की काली कमाई को लखनऊ के रीयल एस्टेट कारोबार में निवेश कर रहा है। इससे जुड़े एक अन्य मामले में नंद किशोर की सीबीआई और ईडी को भी तलाश है। जांच में पता चला कि नंदकिशोर ने हमसफर डीलर्स नामक बेनामी कंपनी खोली थी, जिसके जरिए महाराष्ट्र और लखनऊ में बड़े पैमाने पर मनी लांड्रिंग के जरिए संपत्तियों में निवेश किया गया। हमसफर और उसकी सहयोगी कंपनियों के बेनामी होने के सुराग तलाशने के लिए शुक्रवार को आयकर विभाग के 100 से अधिक अधिकारियों ने छह शहरों में स्थित ठिकानों को खंगाला है। छापे की कार्रवाई शनिवार को भी जारी रहेगी।
इन कंपनियों के ठिकाने खंगाले
आयकर विभाग ने शुक्रवार को हमसफर डीलर्स की सहयोगी कंपनियों केशरदेव पोद्दार रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, पॉनटिक इंफ्रा इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, तिलिचो इंफ्रा डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, तेरे नार्म्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ट्रपेजियम इंफ्रा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों को खंगाला है। वहीं हमसफर डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसकी अन्य सहयोगी कंपनियों पिनटेल ग्रुप, अमरावती, एक्सेला के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर के करीब 50 ठिकानों को बीते वर्ष जून माह में खंगाला जा चुका है। बता दें कि पिनटेल ग्रुप के संचालक रोहित सहाय, रवि पांडेय, रजनीकांत मिश्रा, हरेश मिश्रा आदि से आयकर विभाग पूछताछ कर चुका है।
निदेशक बोले, कंपनी से वास्ता नहीं
आयकर जांच में हमसफर डीलर्स के बेनामी कंपनी होने और सहयोगी कंपनियों के साथ मिलकर 200 एकड़ की टाउनशिप बनाने का लाइसेंस हासिल करने के लिए एलडीए में आवेदन की जानकारी मिली थी। जिसके बाद आयकर विभाग ने एलडीए से हमसफर डीलर्स के बारे में जानकारी मांगी। सामने आया कि एलडीए ने बेनामी कंपनी के टर्नओवर और नेटवर्थ को जांच किए बगैर टाउनशिप का लाइसेंस दे दिया है। वहीं आयकर जांच में पुष्टि हुई कि हमसफर डीलर्स के दोनों निदेशक जतिंदर रिषी टंडन और अमित रिषी टंडन डमी हैं। दोनों ने पूछताछ में कबूला था कि उनको नंदकिशोर ने निदेशक बनाया था, उनका कंपनी के कामकाज से कोई वास्ता नहीं है।