लखनऊ। आज के युवा अपने भविष्य की चिंता में वर्तमान को खराब कर रहे हैं। लोगों से अलग-थलग रहना पसंद करने लगे हैं। परिजन के साथ समय बिताने की जगह फोन पर अधिक वक्त बिता रहे हैं। इससे तनाव ग्रस्त हो रहे हैं। इन समस्याओं का समाधान भगवत गीता में है। गीता सुनने और पढ़ने से तनाव कम होता है। विद्यार्थियों के लिए गीता पढ़ना सबसे अधिक जरूरी है। ये बातें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में कहीं। जीयो गीता परिवार की ओर से रविवार शाम चार बजे विवि के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में गीता परिचर्चा हुई। महाराज ज्ञानानंद ने गीता के महत्व को समझाया। कहा कि आज कल मांएं दो साल के बच्चों को ही फोन चलाना सिखाना शुरू कर देती हैं। फिर बच्चे को लत लग जाती है। मां बच्चे की पहली शिक्षक होती है। अगर शुरू में ही वे ध्यान दें तो डॉक्टर और संतों के पास जानने की जरूरत नहीं पड़ेगी।