लखनऊ। उप्र स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फोरेंसिक साप्ताहिक कोर्स का सोमवार को शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि महानिदेशक कारागार पीसी मीणा ने कहा कि साइबर सुरक्षा एवं फोरेंसिक का यह प्रशिक्षण समय की जरूरत है। आज युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि सर्वर रूम और डाटा सेंटरों में भी लड़े जा रहे हैं। पुलिसिंग में पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अब डाटा की शक्ति को समझना होगा। डिजिटल साक्ष्य कभी झूठ नहीं बोलते, इसलिए विवेचना में मौखिक साक्ष्यों के साथ डिजिटल साक्ष्यों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया प्रशिक्षण में यूपी सहित गोवा, उत्तराखण्ड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखण्ड एवं जम्मू-कश्मीर के कुल 40 पुलिस अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। कोर्स के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्य और फोरेंसिक तकनीकों पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि जो अपराध पहले सड़कों पर होते थे, वे अब साइबर स्पेस में स्थानांतरित हो चुके हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध ई-रॉबरी का नया स्वरूप हैं। आने वाले समय में एजेंटिक क्रिमिनल का खतरा बढ़ेगा, जिससे निपटने के लिए पुलिस को साइबर एवं डिजिटल फोरेंसिक में दक्ष होना अनिवार्य है।