गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली दवाओं की ढाई हजार से ज्यादा गोलियां बछरावां रजबहा में पड़ी मिलीं। भारी संख्या में नहर में पड़ी दवाओं को देखकर राहगीरों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सूचना दी। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंचने पर उनके हाथ पांव फूल गए। सूचना पर पहुंचे स्वास्थ्यकर्मियों ने दवाओं को कब्जे में ले लिया है।
गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली दवाएं कस्बे के बांदा-बहराइच राजमार्ग पर बछरावां रजबहा में पड़ी देखकर ग्रामीण सन्न रह गए। नहर में पानी ना होने के कारण दवाएं एक स्थान पर पड़ी थी। यदि नहर में पानी चलता होता तो शायद दवाएं बह कर कहीं और पहुंच जाती। नहर बंद होने से आयरन फोलिक एसिड की करीब ढाई हजार से ज्यादा गोलियां एक ही स्थान पर पड़ी मिलीं। सभी दवाओं के रैपर पर साफ साफ लिखा था। उत्तर प्रदेश गवरमेंट सप्लाई नॉट फ़ॉर सेल।
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इससे यह साबित हो रहा है कि यह दवाएं किसी मेडिकल स्टोर की न होकर सरकारी अस्पताल की हैं। यह गोलियां सरकारी अस्पताल से एएनम को दी जाती हैं कि वह ग्रामीण इलाकों में जाकर गर्भवती महिलाओं को सौ-सौ गोलियां वितरित करें। गर्भवती महिलाओं को यह आयरन की गोलियां 100 दिनों तक खानी होती हैं । इन दवाओं का इस तरीके से नहर में पड़े होना अपने आप में बहुत सारे सवाल खड़ा करता है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. एके जैसल का कहना है कि रायबरेली जिले में 10 गोलियों के पत्ते उपलब्ध हैं और जो दवाएं बछरावां रजबहा में मिली हैं वे 15 गोलियों के पत्ते में हैं। यह दवाएं किसी अन्य जनपद से लाकर यहां फेंकी गई हैं। मामले की जांच कराई जा रही है और सूचना सीएमओ को दी गई है।