रायबरेली। शहर के सत्यम हॉस्पिटल में इलाज में लापरवाही से मासूम राघव की जान चली गई, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक इंसाफ नहीं मिला है। राघव के मौत के जिम्मेदार अब तक कानून के शिकंजे में नहीं आए हैं। मामले में चाहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जांच हो या फिर पुलिस विभाग की। उससे नहीं लगता कि परिवार को इंसाफ मिल पाएगा। सबसे बड़ा सवाल इस बात का भी है कि मासूम की मौत के आठ दिन बाद भी विवेचक सत्यम हॉस्पिटल संचालक के बेटे और अस्पताल के स्टाफ के बयान दर्ज नहीं कर पाए हैं।
लालगंज क्षेत्र के रानीपुर गांव निवासी सुरेंद्र कुमार शर्मा के दो माह के बेटे राघव की जिस तरह इलाज में बरती गई लापरवाही से मौत हुई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल ये है कि सत्यम हॉस्पिटल में मासूम राघव की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में क्यों सोए रहे। मामला डीएम माला श्रीवास्तव तक पहुंचने के बाद विभाग के अधिकारी हरकत में तो आए, लेकिन उनकी जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पूरे प्रकरण में पुलिस विभाग का भी खेल निराला है। पिता की तहरीर पर हॉस्पिटल संचालक डॉ. केएस सिंह के बेटे डॉ.आशुतोष सिंह पर केस तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन जांच के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विवेचक-इंदिरा नगर चौकी इंचार्ज विश्वास शर्मा घटना में नामजद आरोपी और स्टाफ के बयान दर्ज नहीं कर पाए हैं। कोतवाल संजय त्यागी ने बताया कि मासूम की मौत के मामले की विवेचना कराई जा रही है।
राघव प्रकरण की जांच इंदिरा नगर चौकी इंचार्ज विश्वास शर्मा को दी गई है। यह वही दरोगा है, जो अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर विवादित रहे हैं। अमर उजाला ने विवेचक से सवाल किया गया कि घटना के बाद किसी के बयान दर्ज किए गए कि नहीं। इस पर विवेचक का जवाब था कि कुछ स्टाफ के बयान दर्ज किए गए हैं, लेकिन यह नहीं बता सकता कि किन लोगों के बयान दर्ज हुए। घटना से संबंधित दस्तावेज तलब किए गए हैं कि नहीं। इस पर विवेचक का कहना था कि कुछ दस्तावेज मांगें हैं, लेकिन कौन दस्तावेज मांगें हैं, यह नहीं बता सकता। जाहिर सी बात है कि प्रकरण को लेकर विवेचक छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।