लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने विधि सहित सभी संकायों में गुणात्मक सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। नई व्यवस्था के तहत अब पीएचडी प्रवेश साक्षात्कारों की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और पक्षपात या मनमाने चयन की आशंकाओं पर रोक लगेगी।विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, साक्षात्कार की रिकॉर्डिंग विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सुरक्षित रखी जाएगी। ऐसे में चयन प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार का विवाद या आरोप लगने पर रिकॉर्डिंग के माध्यम से जांच संभव होगी। गौरतलब है कि पूर्व में विभिन्न प्रवेश प्रक्रियाओं के दौरान साक्षात्कार में पक्षपात के आरोप सामने आते रहे हैं।वहीं, विधि पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली और मूल्यपरक शिक्षा को भी शामिल किया जाएगा। इसके अंतर्गत नैतिकता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े विशेष विषयों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों को केवल कानूनी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक और नैतिक रूप से भी जिम्मेदार बनाना है।नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक विभाग के अध्ययन मंडल में शोध छात्रों, उद्योग विशेषज्ञों और पूर्व छात्रों को भी शामिल किया जाएगा। इससे पाठ्यक्रम को रोजगार, उद्योग और शोध की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था विधि सहित सभी विभागों में लागू होगी। इसके अलावा विधि संकाय के विस्तार के लिए गिरि लाल गुप्ता संस्थान और शंकर दयाल शर्मा संस्थान के भवन विधि विभाग को सौंप दिए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन परिसरों में नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।