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सुना है क्या: 'दो करोड़ का ब्याज', साथ ही 'सेवानिवृत्ति के बाद भी सहूलियत व गर्मी में भी खा रहे धूप' के किस्से

Tue, 07 Jul 2026 11:24 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'मंत्रीजी का दो करोड़ का ब्याज' की कहानी। इसके अलावा 'सेवानिवृत्ति के बाद भी सहूलियत' और 'गर्मी में भी खा रहे हैं धूप' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

मंत्रीजी का दो करोड़ का ब्याज

वह वर्षों से मंत्री हैं। हर विभाग में सभी को एक ही किस्सा सुनाते हैं कि हर माह उन्हें दो करोड़ रुपये का बैंक ब्याज देना होता है, जिसका उन्हें इंतजाम करना होता है। हाल ही में उन्होंने अपने एक अधिकारी को यह बात बताकर दबाव बनाना चाहा तो बात ऊपर तक पहुंच गई। इसके बाद उनके पर कतर दिए गए। उनके साथ काम कर चुके एक अधिकारी फरमाते हैं कि अभी तो पर ही कतरे गए हैं। अल्टीमेटम पर नहीं सुधरे तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

सेवानिवृत्ति के बाद भी सहूलियत

एक विभाग से डीजी की सेवानिवृत्ति हुई। विभाग से नाता पूरी तरह खत्म हो गया लेकिन ऐसा हुआ नहीं। डीजी साहब को सहूलियतों में कमी की आदत नहीं है। लिहाजा दो सिपाहियों की तैनाती अपने साथ करा ली है ताकि वह जहां जाएं, वहां उनका माहौल पूरा बना रहे। वह सिपाही उनके काम भी करते रहें। चर्चा ये भी है कि इसी तरह की सुविधा कई सेवानिवृत्त अधिकारी ले रहे हैं, ताकि, दबदबा बना रहे।

गर्मी में भी खा रहे हैं धूप

प्रदेश के एक प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय के हाल अजीब ही हैं। आमतौर पर लोग जाड़े में धूप खाते हैं लेकिन यहां तो एक कर्मचारी पूरे कुनबे (सहयोगियों) को लेकर भीषण गर्मी में भी धूप खा रहे हैं। खास यह कि एक दिन इनको विश्वविद्यालय के मुखिया ने परिसर भ्रमण करते पकड़ लिया। ऐसे में अन्य सहयोगी एक-एक कर खिसक लिए। मुखिया ने एक को बुलाकर पूछा कि ड्यूटी से इतर यह कैसा भ्रमण, जवाब मिला...धूप खाने गए थे। खैर, मुखिया की फटकार के बाद यह धूप खाने की नियमित प्रक्रिया बंद हो गई है।

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